विधायक अंबिका मरकाम ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि क्षेत्र में कई विकास कार्य उनकी अनुशंसा पर स्वीकृत हुए हैं, लेकिन कुछ लोग इन कार्यों का श्रेय स्वयं लेने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दूसरे के कार्यों पर अपनी वाहवाही लूटना बंद किया जाना चाहिए।
विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ समाचार पत्रों और पोर्टल न्यूज के माध्यम से यह अफवाह फैलाई जा रही है कि काजल नदी पर 6 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले पुल और विभिन्न स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष एवं प्रार्थना शेड निर्माण की स्वीकृति जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रयासों से मिली है। उन्होंने इसे पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया।
अंबिका मरकाम ने कहा कि वास्तविकता यह है कि ऐसे सभी कार्य उनके द्वारा की गई अनुशंसा के आधार पर ही स्वीकृत हुए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिला पंचायत अध्यक्ष के पास राज्य शासन से इस प्रकार के कार्यों की स्वीकृति दिलाने का अधिकार नहीं होता है। इसलिए इस तरह का प्रचार करना जनता को भ्रमित करने जैसा है।
विधायक ने कहा कि विकास कार्यों का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को सुविधाएं प्रदान करना है, न कि राजनीतिक लाभ लेना। उन्होंने संबंधित जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे सच्चाई को सामने रखें और जनता के बीच गलत जानकारी फैलाने से बचें।
इस पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। जबर्रा के सरपंच माधव मरकाम ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विकास कार्यों को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए और सही व्यक्ति को ही उसका श्रेय मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि नगरी-सिहावा क्षेत्र में इन दिनों कई महत्वपूर्ण विकास कार्य चल रहे हैं, जिनमें सड़क निर्माण, पुल निर्माण और शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार जैसे कार्य शामिल हैं। ऐसे में इन कार्यों के श्रेय को लेकर राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को गर्म कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों से विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है और जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि सभी जनप्रतिनिधि आपसी समन्वय बनाकर कार्य करें और विकास को प्राथमिकता दें।
फिलहाल, यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।