शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज से पुलिसिया दुर्व्यवहार, सनातन संस्कृति का अपमान: मनोज सिंह ठाकुर
ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को पुलिस द्वारा रोके जाने और उनके शिष्यों की गिरफ्तारी पर वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे सनातन धर्म की सर्वोच्च पीठ और करोड़ों सनातनियों की आस्था का अपमान बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर (छत्तीसगढ़)। ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के साथ कथित पुलिसिया दुर्व्यवहार एवं उनके शिष्यों की गिरफ्तारी को लेकर समाज में तीव्र आक्रोश व्याप्त है। इस घटना पर वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी मनोज सिंह ठाकुर ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे सनातन धर्म की सर्वोच्च पीठ और करोड़ों सनातनी हिंदुओं की धार्मिक आस्था का अपमान करार दिया है।
मनोज सिंह ठाकुर ने जारी अपने बयान में कहा कि शंकराचार्य जी न केवल एक महान संत हैं, बल्कि हिंदू धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु भी हैं। वे किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि में संलिप्त नहीं हैं, बल्कि गौ माता को “राष्ट्रमाता” का दर्जा दिलाने जैसे पवित्र एवं जनकल्याणकारी उद्देश्य के साथ अपनी यात्रा पर निकले हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा उन्हें मार्ग में रोकना और उनके अनुयायियों पर बल प्रयोग करना अत्यंत निंदनीय एवं अलोकतांत्रिक है।
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल एक संत विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा आघात है। प्रशासनिक कठोरता के नाम पर धार्मिक मर्यादाओं की अनदेखी करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। मनोज सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि इस घटना से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं और शासन-प्रशासन को इसकी गंभीरता समझनी चाहिए।
इस प्रकरण को लेकर उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज की यात्रा में उत्पन्न की जा रही सभी प्रशासनिक बाधाओं को तत्काल समाप्त किया जाए। दूसरी, गिरफ्तार किए गए निर्दोष शिष्यों को बिना किसी देरी के रिहा किया जाए। तीसरी, इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अधिवक्ता ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शंकराचार्य जी महाराज को सम्मानपूर्वक उनकी यात्रा पूर्ण करने से रोका गया, तो वे विधिक और लोकतांत्रिक तरीकों से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर सनातन धर्म के ध्वजवाहकों को पूर्ण सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता प्रदान करने की मांग की है।