यह पदयात्रा सतनामी समाज के महान संत गुरु घासीदास बाबा के सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। यात्रा के दौरान हर पड़ाव पर श्रद्धालुओं ने बाबा जी के विचारों को आत्मसात करते हुए सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया।
पांचवें दिन का उत्साह अपने चरम पर है। आज सुबह लवन से पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। इसके बाद पदयात्रा कसडोल और छरछेद होते हुए आगे बढ़ी, जहाँ स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों द्वारा भव्य स्वागत की तैयारियाँ की गईं। इसके पश्चात छाछी, कटगी और अमोदी गांवों में यात्रियों के लिए जलपान एवं विश्राम की व्यवस्था की गई है।
धाम के निकट पहुँचते ही मटिया और मड़वा क्षेत्र में श्रद्धालुओं का उत्साह दोगुना देखने को मिल रहा है। मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालु “सतनाम” के जयघोष के साथ पदयात्रियों का अभिनंदन कर रहे हैं। पूरे रास्ते में पंथी नृत्य की गूंज और भक्ति गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया है।
शाम तक यह विशाल कारवां गिरौदपुरी धाम की पावन धरा पर प्रवेश करेगा। यहाँ मुख्य जैतखाम की परिक्रमा के बाद गुरु घासीदास बाबा जी के चरणों में मत्था टेककर प्रदेश की खुशहाली, शांति और सामाजिक सौहार्द के लिए सामूहिक प्रार्थना की जाएगी। ‘सत्यनाम’ के उद्घोष के साथ पदयात्रा का विधिवत समापन होगा।
यह पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक सद्भाव का मजबूत संदेश बनकर उभरी है। यात्रा मार्ग पर हर जाति, वर्ग और समुदाय के लोगों ने एक साथ मिलकर स्वागत किया, जो छत्तीसगढ़ की गंगा-जमुनी परंपरा को दर्शाता है।
हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। लवन से गिरौदपुरी मार्ग तक यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए पुलिस बल तैनात है। स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत पदयात्रा के साथ एंबुलेंस और मेडिकल टीम को भी लगाया गया है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी समूहों के कार्यकर्ता पेयजल, भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था में दिन-रात जुटे हुए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह पदयात्रा समाज को जोड़ने और आने वाली पीढ़ियों को सत्य, अहिंसा और समानता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे रही है।