विजय कुमार झा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मुस्लिम शासकीय कर्मचारियों को रमजान के दौरान एक घंटे पूर्व कार्यालय छोड़ने की सुविधा पूर्व में भारतीय जनता पार्टी की ही सरकारों के कार्यकाल में वर्ष 2005, 2008 और 2015 तक जारी रही है। उन्होंने दावा किया कि शासन की अधिकृत सुविधा हैंडबुक में भी रमजान माह में यह अवकाश प्रारंभ से लेकर रमजान समाप्ति तक दिए जाने का उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि 19 फरवरी से रमजान का महीना प्रारंभ होते ही इस विषय पर चर्चाएं शुरू हुईं, जिसके बाद राज्य सरकार ने 20 फरवरी को आदेश जारी कर मीडिया में प्रकाशित एक घंटे पूर्व अवकाश संबंधी खबरों को भ्रामक और आधारहीन बताया। विजय कुमार झा का आरोप है कि यह निर्णय मुस्लिम कर्मचारियों के प्रति बदले की भावना और धार्मिक राग-द्वेष को दर्शाता है। उन्होंने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए निंदनीय करार दिया।
आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस तरह के निर्णय समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने का काम करते हैं। विजय कुमार झा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मांग की है कि तत्काल इस आदेश को निरस्त करते हुए रमजान के दौरान रोजा समाप्ति से एक घंटा पहले कार्यालय छोड़ने की सुविधा को पुनः लागू किया जाए।
वहीं रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अज़ीम खान ने इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि सरकार की अत्यधिक चापलूसी करना भी सही नहीं है और लगातार समाज के खिलाफ बयानबाजी से न तो समाज में सम्मान बचा है और न ही सरकार गंभीरता से ले रही है।
दरअसल, बीते 24 घंटों में सोशल मीडिया पर कई खबरें वायरल हुईं, जिनमें वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के हवाले से यह दावा किया गया कि मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पहले कार्यालय छोड़ने की अनुमति संबंधी चिट्ठी जारी कर दी गई है। कुछ खबरों में तो यहां तक कहा गया कि वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने सरकार के इस कथित फैसले का स्वागत भी किया है।
इसी बीच पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक विभाग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के समाचार तथ्यहीन और भ्रामक हैं। इसके बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को गलत जानकारी दी गई या फिर सरकार और वक्फ बोर्ड के बीच समन्वय की कमी सामने आई है।
आम आदमी पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पूरा मामला मुस्लिम कर्मचारियों में भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा कर रहा है। पार्टी ने सरकार से स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से स्थिति साफ करने की मांग की है, ताकि रमजान के पवित्र महीने में किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो और पूर्व से चली आ रही सुविधा को बहाल किया जा सके।
यह बयान राजधानी रायपुर से जारी किया गया है, जहां से पार्टी नेताओं ने पूरे प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।