भानुप्रतापपुर में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम: माताओं को परिवार और समाज के विकास में सशक्त बनाने पर जोर
भानुप्रतापपुर के सरस्वती शिशु मंदिर में विद्या भारती एवं सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में माताओं को परिवार के एकता सूत्र में बांधने, संस्कारवान बच्चों का निर्माण और समाज के विकास में सशक्त भूमिका निभाने पर जोर दिया गया। मुख्य वक्ता नलिनी वाजपेयी ने नारी शक्ति, सहनशीलता और मातृत्व की महिमा पर विस्तृत प्रकाश डाला।
UNITED NEWS OF ASIA. श्रीदाम ढाली, कांकेर | भानुप्रतापपुर | सरस्वती शिशु मंदिर भानुप्रतापपुर में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान और सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में मातृशक्ति की महिमा और शक्ति, भक्ति तथा युक्ति की त्रिवेणी का गुणगान करने हेतु सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य माताओं को परिवार और समाज के विकास में सशक्त बनाने, बच्चों में संस्कार और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करने और मातृत्व की शक्ति को पहचानने पर जोर देना था।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में शिक्षाविद् एवं सेवानिवृत्त प्रधान पाठिका नलिनी वाजपेयी उपस्थित रहीं। अध्यक्षीय आसंदी पर दीप्ति ठाकुर विराजमान थीं। द्वितीय वक्ता एवं कार्यक्रम की संयोजिका सुनीता साहू तथा विशिष्ट अतिथि मंदाकिनी कोठारी मंच पर उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत नवयुग के नव विचार वाले गीत और दीप प्रज्वलन से हुई। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार की दीदीयों द्वारा किया गया।
मुख्य वक्ता नलिनी वाजपेयी ने कहा कि “यत्र नार्यस्तु पुज्यन्ते रमंते तत्र देवता”, अर्थात जहाँ नारियों का सम्मान होता है वहाँ देवता निवास करते हैं। उन्होंने श्रीमद् भागवत गीता के दसवें अध्याय के 34वें श्लोक के संदर्भ में नारी के सप्त गुण—श्री, कीर्ति, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमता—के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिवार की एकता और समाज की सुदृढ़ता माताओं के जागृत होने पर निर्भर करती है। माताओं के सही नेतृत्व और संस्कारपूर्ण जीवन के माध्यम से बच्चों का विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
द्वितीय वक्ता सुनीता साहू ने पंच परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी एवं नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि परिवार और समाज तभी सुखी रह सकते हैं जब माताएँ अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध रखें और बच्चों को पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण की शिक्षा दें।
अध्यक्षीय आसंदी पर उपस्थित दीप्ति ठाकुर ने कहा कि सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम महिलाओं को संगठित और सशक्त बनाने, उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों को जानने एवं समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए एक मंच प्रदान करता है। उन्होंने माताओं को साहसी और सहनशील रहने, परिवार और समाज के लिए नेतृत्व करने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में बच्चों ने सामूहिक गीत “हम ही मातृ शक्ति हैं” प्रस्तुत किया। माताओं के अंदर छुपी प्रतिभाओं को उजागर करने हेतु प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया, जिसमें माताओं ने सक्रिय भाग लिया और पुरस्कार प्राप्त किए। बच्चों ने रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई, दुर्गावती और मीराबाई की वेशभूषा में झांकियां प्रस्तुत कर माताओं को प्रेरित किया। समाज में विशिष्ट कार्य करने वाली माताओं को श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
अंत में माताओं ने पर्यावरण संरक्षण, मितव्ययता, नागरिक कर्तव्य, परिवार व्यवस्था और विश्व कल्याण के प्रति संकल्प लेते हुए “सर्वे भवंतु सुखिनः” का सामूहिक गायन किया और कार्यक्रम का समापन हुआ। वरिष्ठ आचार्य शकुंतला सिंह ने कार्यक्रम का आभार व्यक्त किया।
यह कार्यक्रम माताओं को उनके अंदर छिपी शक्ति और नेतृत्व क्षमता को पहचानने का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक प्रभावशाली पहल साबित हुआ।