कर्मचारियों को “एस्मा” लगाकर डराना अलोकतांत्रिक: संतराम नेताम
छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष संतराम नेताम ने सोसाइटी कर्मचारियों की हड़ताल तोड़ने के लिए एस्मा कानून लागू करने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी न्यायोचित मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकार का कर्तव्य है उन्हें भय दिखाने के बजाय उनके मुद्दों का समाधान करना। नेताम ने बीजेपी सरकार पर कर्मचारी विरोधी तानाशाही और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
UNITED NEWS OF ASIA.रामकुमार भारद्वाज , कोंडागांव | छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष संतराम नेताम ने सोसाइटी कर्मचारियों की हड़ताल तोड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए एस्मा कानून का कड़ा विरोध करते हुए इसे अलोकतांत्रिक और कर्मचारी विरोधी बताया। संतराम नेताम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता की सेवा में तैनात कर्मचारियों को उचित पोषण और सुरक्षा प्रदान करे ताकि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा और मुस्तैदी से कर सकें।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कर्मचारी वर्ग की जायज मांगों को पूरा करने में विफल रहने के बाद तानाशाही का रास्ता अपनाया है। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में अनशन का सहारा लिया, और उम्मीद की कि भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद कर्मचारियों के हितों को महत्व देगी। लेकिन उनके अनुसार, राज्य में सत्ता में आने के तुरंत बाद ही सरकार ने कर्मचारियों के अधिकारों का दमन शुरू कर दिया।
संतराम नेताम ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से कर्मचारियों और अधिकारियों का शोषण किया जा रहा है। महंगाई भत्ते और अन्य लाभों की मांग के लिए उन्हें आंदोलन करना पड़ता है। उनके अनुसार, राज्य में ऐसा कोई कर्मचारी संघ नहीं है जिसने सरकार के खिलाफ मोर्चा न खोला हो। अब सोसाइटी कर्मचारियों पर एस्मा लागू कर उन्हें डराने का प्रयास किया जा रहा है, जो कर्मचारियों के असंतोष को दबाने का तानाशाही फरमान है।
पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी सरकार शोषण की राजनीति कर रही है और राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं रखती। कर्मचारियों की मांगें पूरी न करने की बजाय सरकार डर का माहौल बना रही है और भय का साम्राज्य चला रही है। संतराम नेताम ने बताया कि सोसाइटी कर्मचारियों ने एस्मा आदेश की प्रतियां जलाई हैं और भविष्य में इसका असंतोष सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को डराने और धमकाने के बजाय कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। हड़ताल कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है और इसे दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। संतराम नेताम ने कांग्रेस की ओर से कर्मचारियों के समर्थन का आश्वासन देते हुए कहा कि सत्ता में आने पर उनकी सभी न्यायोचित मांगों को पूरा किया जाएगा।
नेताम ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की हड़ताल का उद्देश्य केवल अपने अधिकारों की मांग करना है और सरकार का कर्तव्य है कि वह इसे शांतिपूर्वक और संवैधानिक रूप से हल करे। उन्होंने कहा कि डर और दमन से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि संवाद और सहमति से ही स्थायी समाधान संभव है।
संतराम नेताम का यह बयान राज्य में कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रहे तनाव के बीच आया है और इसे कर्मचारी वर्ग के लिए आश्वासन तथा सरकार के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।