UNITED NEWS OF ASIA. जीके कुर्रे, सक्ती l सक्ती शहर सावन के चौथे सोमवार पर भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया। सुबह से ही शहर में हर हर महादेव के जयकारों की गूंज सुनाई देती रही। सावन के पवित्र सोमवार के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए तुर्रिधाम शिव मंदिर की ओर पदयात्रा पर रवाना हुए।
सक्ती के महामाया मंदिर से श्रद्धालुओं के तुर्रिधाम जाने का सिलसिला शुरू हुआ। सैकड़ों की संख्या में भक्त हाथों में जल लेकर और भगवान शिव का नाम जपते हुए पदयात्रा करते नजर आए। श्रद्धालु पूरे रास्ते हर हर महादेव और भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। भक्तों की आस्था और उत्साह के चलते शहर का माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया।
सावन के चौथे सोमवार को भगवान शिव के जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। इसी आस्था के साथ सक्ती और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु तुर्रिधाम पहुंचने के लिए पैदल निकले। महामाया मंदिर से तुर्रिधाम शिव मंदिर की दूरी करीब 10 से 15 किलोमीटर बताई जा रही है। इतनी दूरी होने के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह कम नहीं दिखा और वे भक्ति भाव के साथ पदयात्रा करते हुए मंदिर की ओर बढ़ते रहे।
पदयात्रा के दौरान जगह-जगह शिवभक्तों की भीड़ नजर आई। श्रद्धालु एक-दूसरे के साथ भगवान शिव का जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। हर हर महादेव के नारों से सक्ती शहर और पदयात्रा मार्ग गूंज उठा। सावन सोमवार के अवसर पर निकल रही इस पदयात्रा में युवाओं के साथ बड़ी संख्या में अन्य श्रद्धालु भी शामिल हुए।
तुर्रिधाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्तों का मानना है कि सावन सोमवार पर भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी धार्मिक आस्था के साथ श्रद्धालु लंबी दूरी तय कर तुर्रिधाम पहुंच रहे हैं।
सक्ती शहर में सावन के चौथे सोमवार को सुबह से ही धार्मिक उत्साह देखने को मिला। मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ शिवभक्तों की पदयात्रा ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। महामाया मंदिर से तुर्रिधाम के लिए रवाना हुए श्रद्धालुओं के हर हर महादेव के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
सावन के चौथे सोमवार पर सक्ती में उमड़ा यह जनसैलाब भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति को दर्शाता है। पदयात्रा के दौरान भक्त पूरे उत्साह के साथ तुर्रिधाम की ओर बढ़ते रहे और भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करने के लिए रवाना हुए।