शिविर के दौरान कुल 87 गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क सोनोग्राफी की गई। जांच के माध्यम से गर्भ में पल रहे शिशु के विकास की स्थिति की जानकारी मिली और जिन महिलाओं में हाई-रिस्क गर्भावस्था की आशंका पाई गई, उन्हें तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। चिकित्सकों ने गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसव पूर्व जांच, संतुलित आहार लेने, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां समय पर लेने तथा संस्थागत प्रसव कराने की सलाह दी। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि वनांचल क्षेत्र में इस प्रकार की सुविधा मिलना उनके लिए अत्यंत राहत की बात है।
चिकित्सकों ने बताया कि सोनोग्राफी से गर्भ में शिशु के विकास की निगरानी, प्रसव तिथि का सही आकलन, प्लेसेंटा एवं अम्नियोटिक द्रव की स्थिति की जांच की जाती है। इसके माध्यम से जन्मजात विकृतियों, प्लेसेंटा प्रीविया जैसी जटिलताओं और एक से अधिक शिशु होने की स्थिति का भी समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे सुरक्षित गर्भावस्था और प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।
शिविर में 119 ग्रामीणों की सामान्य स्वास्थ्य जांच (ओपीडी) की गई। इसमें बुखार, कमजोरी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह सहित सामान्य रोगों की जांच कर निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। डॉक्टरों द्वारा ग्रामीणों को स्वच्छता, पोषण और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया।
रक्तदान शिविर के अंतर्गत कुल 8 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इस अवसर पर जुगनू और उनकी पत्नी किरण ने एक साथ रक्तदान कर समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। चिकित्सकों ने बताया कि रक्तदान से दुर्घटना, प्रसव और शल्य चिकित्सा के दौरान जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती है। साथ ही रक्तदान से दाता के शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण भी बढ़ता है।
शिविर के दौरान राष्ट्रीय प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 3 टीबी मरीजों को पोषण युक्त आहार किट का वितरण किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीबी उपचार में दवाओं के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी अत्यंत आवश्यक होता है।
इस शिविर का लाभ रेंगाखार सेक्टर के खारा रेंगाखार, समनापुर, बहमनी, लोहाराडीह, बांदाटोला, निवासपुर तथा चिल्ली सेक्टर के शीतलपानी गांव के ग्रामीणों को मिला। ये सभी क्षेत्र ऐसे हैं, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सीमित रूप में उपलब्ध हैं और ऐसे शिविर ग्रामीणों के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हो रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेंद्र तूरे ने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में नियमित अंतराल पर ऐसे स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि हर गर्भवती महिला की समय पर जांच सुनिश्चित हो सके। वहीं बीएमओ डॉ. पुरुषोत्तम राजपूत ने बताया कि सोनोग्राफी से गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं का पता प्रारंभिक अवस्था में लग जाता है, जिससे समय रहते उपचार संभव होता है।
ग्रामीणों ने इस पहल के लिए स्वास्थ्य विभाग और शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ऐसे शिविर आगे भी आयोजित किए जाने की मांग की।