धार्मिक मंच को राजनीतिक अखाड़ा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण, विश्वकर्मा जयंती के मंच से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर टिप्पणी निंदनीय: पवन गुप्ता

अंबागढ़ चौकी में विश्वकर्मा जयंती कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर कथित राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर नगर पंचायत उपाध्यक्ष पवन गुप्ता ने आपत्ति जताई। उन्होंने धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने और ऐसे मंचों पर राजनीतिक बयानबाजी से बचने की अपील की।

Sep 23, 2026 - 07:41
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धार्मिक मंच को राजनीतिक अखाड़ा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण, विश्वकर्मा जयंती के मंच से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर टिप्पणी निंदनीय: पवन गुप्ता

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख, मानपुर l विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लेकर कथित राजनीतिक टिप्पणियों पर नगर पंचायत अंबागढ़ चौकी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता पवन गुप्ता ने आपत्ति जताई है। उन्होंने धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के मंच की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की बात कही।

पवन गुप्ता ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, निर्माण, श्रम और कर्म के प्रतीक हैं। ऐसे पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भगवान विश्वकर्मा के आदर्शों, श्रमिकों और कारीगरों के सम्मान तथा क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने धार्मिक आयोजन के मंच से राजनीतिक विरोध, व्यक्तिगत कटाक्ष और आरोप-प्रत्यारोप किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि खुज्जी विधायक भोलाराम साहू ने ठेकेदार संघ द्वारा आयोजित विश्वकर्मा जयंती कार्यक्रम के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक बयानबाजी के लिए किया। पवन गुप्ता के अनुसार यदि कार्यक्रम ठेकेदार संघ का था तो उसमें ठेकेदारों की समस्याओं, निर्माण कार्यों, रोजगार और क्षेत्रहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी जानी चाहिए थी।

पवन गुप्ता ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस भी था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भाषा तथा मंच की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार जन्मदिन जैसे अवसर पर शुभकामनाएं देना सामाजिक परंपरा का हिस्सा है और राजनीतिक मतभेदों को अलग मंच पर रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक विरोध से पीछे नहीं हटती, लेकिन विरोध का भी एक स्तर और मर्यादा होती है। प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उनकी नीतियों और निर्णयों पर राजनीतिक बहस लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में व्यक्तिगत टिप्पणी या राजनीतिक कटाक्ष से बचना चाहिए।

पवन गुप्ता ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती के मंच पर श्रमिकों, कारीगरों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों की समस्याओं तथा क्षेत्र के विकास पर चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि किसी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक सभा में बदलने से आयोजन के मूल उद्देश्य पर असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध करना है तो राजनीतिक मंच का उपयोग किया जाना चाहिए। धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों को राजनीतिक कटुता से अलग रखना जरूरी है। उन्होंने विधायक भोलाराम साहू से भविष्य में ऐसे आयोजनों की गरिमा का सम्मान करने तथा जनता, ठेकेदारों, श्रमिकों और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।