आकाश तिवारी के अनुसार फाफाडीह क्षेत्र में HCG प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क की खुदाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि मौके पर कंपनी के पास नगर निगम की कोई वैध अनुमति या आदेश उपलब्ध नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करीब दो महीने से काम चल रहा है, लेकिन इसकी जानकारी जिला प्रशासन और नगर निगम तक नहीं पहुंची। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मौके का निरीक्षण करने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा से फोन पर चर्चा कर स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने कथित तौर पर बिना अनुमति चल रहे कार्य को तत्काल रुकवाने और खुदाई के कारण सड़क पर बने बड़े गड्ढों को बंद कराने की मांग की। उनका कहना था कि सड़कों की खुदाई से आम लोगों को परेशानी हो रही है और पहले से बनी सड़क की स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
आकाश तिवारी ने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर सार्वजनिक सड़कों को बिना उचित व्यवस्था के नहीं खोदा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर शहर में विकास कार्यों के लिए बजट की कमी की बात सामने आती है, वहीं दूसरी ओर तैयार सड़कों को खोदकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खुदाई के दौरान पेयजल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम और जिला प्रशासन से संबंधित कार्य के दस्तावेजों और अनुमति की जांच करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी द्वारा नियमों का उल्लंघन कर सड़क की खुदाई की गई है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कंपनी पर बड़ा जुर्माना लगाने की मांग करते हुए सड़क को जल्द व्यवस्थित कराने की बात कही।
आकाश तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि नियमों का पालन किए बिना इसी तरह सड़क खुदाई जारी रही और आम जनता को परेशानी होती रही तो कांग्रेस की ओर से इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन उनके लिए निर्धारित नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन भी किया जाना चाहिए। सड़क खुदाई के बाद उसकी मरम्मत और यातायात व्यवस्था को लेकर भी संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की गई।
इस दौरान आकाश तिवारी के साथ पूर्व शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गिरीश दुबे, पूर्व एल्डरमैन सुनील भुवाल, कांग्रेस कमेटी के सुदीप होर सहित स्थानीय व्यापारी और अन्य लोग मौजूद रहे। अब मामले में नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक विभाग की ओर से अनुमति तथा कार्य की वैधता की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।