रायपुर में पुलिस और बैंक अधिकारियों की संयुक्त बैठक, साइबर ठगी और वित्तीय अपराधों पर रोक के लिए बने नए दिशा-निर्देश
रायपुर में पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह की अध्यक्षता में बैंकों के लीगल हेड और लीड बैंक मैनेजरों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में साइबर ठगी, संदेही ट्रांजेक्शन, खाते का सत्यापन, सीसीटीवी व्यवस्था और बैंक-पुलिस समन्वय जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैंकों को 1930 हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करने, खाताधारकों की कड़ी जांच और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत जानकारी पुलिस को देने के निर्देश दिए गए। उद्देश्य है साइबर अपराधों पर अंकुश लगाना और पीड़ितों की धनराशि की शीघ्र रिकवरी सुनिश्चित करना।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर । रायपुर पुलिस द्वारा साइबर अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के मार्गदर्शन में और पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह की अध्यक्षता में सिविल लाइन रायपुर स्थित सी-04 भवन में बैंकों के लीड बैंक मैनेजर और लीगल हेड अधिकारियों की बैठक संपन्न हुई।
बैठक में नगर पुलिस अधीक्षक आजाद चौक ईशु अग्रवाल, उप पुलिस अधीक्षक (क्राइम) संजय सिंह, नगर पुलिस अधीक्षक कोतवाली केशरी नंदन नायक, नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाइन रमाकांत साहू समेत कई पुलिस अधिकारी और बैंक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा और निर्देश जारी किए गए:
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ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर ग्राहकों को तुरंत 1930 टोल फ्री नंबर पर कॉल करने या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करें।
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खाता खोलने से पहले ग्राहक का मोबाइल नंबर कॉल या मैसेज के माध्यम से सत्यापित करें।
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कॉर्पोरेट खातों के पते का 15 दिन बाद पुनः भौतिक सत्यापन करें।
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बैंक के प्रवेश और पीछे दोनों जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर स्पष्ट सूचना प्रदर्शित करें।
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संदिग्ध ट्रांजेक्शन, डिमांड ड्राफ्ट वेरिफिकेशन और बार-बार खाते खोलने वाले व्यक्तियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
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लीगल विभाग के लिए एक समर्पित अधिकारी और मोबाइल नंबर जारी करें ताकि स्थानांतरण से कार्य प्रभावित न हो।
बैठक में यह भी तय किया गया कि पुलिस और बैंक मिलकर समन्वित कार्ययोजना तैयार करेंगे ताकि ठगी के मामलों को समय रहते रोका जा सके, अपराधियों तक पहुंच बनाई जा सके और पीड़ितों के पैसे की जल्द से जल्द वापसी सुनिश्चित की जा सके।
डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि बैंक और पुलिस का मिलाजुला प्रयास ही साइबर अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगा सकता है। उन्होंने कहा कि इस समन्वय से न केवल अपराधियों को पकड़ा जा सकेगा बल्कि नागरिकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
यह बैठक रायपुर में साइबर सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी और आने वाले समय में ठगी जैसे अपराधों की रोकथाम में मददगार बनेगी।