कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. नारायण साहू, अधिष्ठाता, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में दैनिक आहार में शामिल की जाने वाली प्राकृतिक सब्जियों के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने पालक, लाल भाजी सहित अन्य स्थानीय एवं मौसमी सब्जियों को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि ये सब्जियां न केवल शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होती हैं।
डॉ. साहू ने यह भी बताया कि प्राकृतिक सब्जियों और वनस्पति आधारित उत्पादों का उपयोग केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इनसे प्राकृतिक रंगों एवं विभिन्न उपयोगी उत्पादों का निर्माण भी किया जा सकता है। उन्होंने टेसू के फूल और कत्था जैसे प्राकृतिक तत्वों के सुरक्षित एवं पर्यावरण हितैषी उपयोग की जानकारी सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से दी। उनके अनुसार रासायनिक रंगों और उत्पादों के स्थान पर प्राकृतिक विकल्प अपनाकर हम स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा भी कर सकते हैं।
कार्यक्रम की विशिष्ट वक्ता डॉ. रूना शर्मा, सौंदर्य विशेषज्ञ एवं त्वचा रोग परामर्शदाता, ने हर्बल पद्धतियों के माध्यम से त्वचा की देखभाल पर विशेष जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों एवं घरेलू उपायों से त्वचा को सुरक्षित, स्वस्थ और दीर्घकालिक लाभ पहुंचाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने रासायनिक सौंदर्य प्रसाधनों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को सावधान रहने की सलाह दी और प्राकृतिक विकल्प अपनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष मोहन वरलियानी ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आज की तेज रफ्तार और रसायन-प्रधान जीवनशैली से बाहर निकलकर प्रकृति के करीब जाना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अनिल चौहान द्वारा किया गया, जिनके कुशल प्रबंधन से कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ. विजय जैन, संजय शर्मा, शिल्पी नागपुरे एवं लक्ष्मी यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने प्राकृतिक खेती, हर्बल उत्पादों के प्रयोग और पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने अपने दैनिक जीवन में प्राकृतिक उत्पादों को अपनाने, रासायनिक वस्तुओं के उपयोग को कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का सामूहिक संकल्प लिया। आयोजन ने यह संदेश स्पष्ट किया कि स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति से जुड़ना ही सबसे प्रभावी मार्ग है।