परिजनों के अनुसार, घटना से पहले राजेश उपाध्याय ने अपनी मां को कुछ लोगों से जान का खतरा होने की बात बताई थी। पुलिस प्रशासन को दिए गए आवेदन में उज्जवल पांडे और राहुल पांडे समेत कुछ लोगों पर आरक्षक के साथ मारपीट किए जाने का संदेह जताया गया है। परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।
परिजनों ने जांच के दायरे में 5 और 6 अगस्त की सीसीटीवी फुटेज को शामिल करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने राजेश उपाध्याय के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, संदिग्ध बताए जा रहे लोगों के मोबाइल और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग की है। आवेदन में फोरेंसिक जांच रिपोर्ट और घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों के बयान की जांच किए जाने की मांग भी शामिल है।
परिजनों ने यह सवाल भी उठाया है कि पुलिस आरक्षक की मौत के मामले में अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई। उनका आरोप है कि घटना के बाद राजेश उपाध्याय को अस्पताल पहुंचाने में भी देरी हुई। परिजनों के अनुसार, एंबुलेंस पहुंचने से पहले ही उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जांच कर मौत की वास्तविक वजह सामने लाने और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, मामले को लेकर जिले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव का कहना है कि पुलिस आरक्षक राजेश उपाध्याय की मौत के मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामला पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ है, इसलिए वह स्वयं पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। एसपी के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मारपीट, चोट, अस्पताल पहुंचाने में देरी और अन्य आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, फोरेंसिक रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जैसे साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब जांच पूरी होने के बाद ही पुलिस आरक्षक राजेश उपाध्याय की मौत के वास्तविक कारण और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।