निरीक्षण के दौरान बालक आश्रम-बेड़मा, शासकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हितामपारा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हांदावाड़ा का जायजा लिया गया। ग्रामीणों की ओर से स्वास्थ्य, शौचालय और आंगनबाड़ी से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
महीनों से बंद स्वास्थ्य केंद्र
ग्रामीणों के अनुसार हांदावाड़ा और बेड़मा का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कई महीनों से बंद पड़ा है। स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को गंभीर बीमारी की स्थिति में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण कई बार वे पारंपरिक उपचार के लिए देवी-देवताओं के पास जाने को मजबूर होते हैं। उनका कहना है कि लगातार स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने के कारण अस्पताल पर निर्भर रहना मुश्किल हो गया है।
2023 से अधूरा है शौचालय निर्माण
निरीक्षण के दौरान माध्यमिक विद्यालय जास्म और हितामपारा में शौचालय निर्माण का काम वर्ष 2023 से अधूरा होने की बात सामने आई। निर्माण पूरा नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों और विद्यार्थियों के अनुसार शौचालय की सुविधा नहीं होने से उन्हें नदी-नालों और खुले स्थानों का सहारा लेना पड़ता है।
ग्रामीणों ने शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत राशि और अब तक खर्च की गई राशि की जानकारी सामने लाने तथा पूरे मामले की जांच की मांग की है। जिला पंचायत सदस्य ने भी अधूरे निर्माण की जांच और कार्य को जल्द पूरा कराने की मांग संबंधित विभाग से करने की बात कही।
140-150 घरों के गांव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं
ग्रामीणों ने हांदावाड़ा-बेड़मा क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं होने की समस्या भी बताई। ग्रामीणों के अनुसार गांव में करीब 140 से 150 घर हैं, इसके बावजूद यहां आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र के लिए कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई।
दुर्गम रास्तों के बावजूद स्कूल पहुंच रहे शिक्षक
निरीक्षण के दौरान हितामपारा सहित अन्य स्कूलों में शिक्षक उपस्थित मिले। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के कई शिक्षक नदी-नालों और कठिन पगडंडी रास्तों को पार कर नियमित रूप से विद्यालय पहुंचते हैं और बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने शिक्षकों के इस प्रयास की सराहना की।
राकेश उसेंडी ने कहा कि बच्चों और शिक्षकों को शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा के लिए नदी-नालों और खुले स्थानों में जाने की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने संबंधित विभाग से अधूरे निर्माण की जांच कराने, कार्य शीघ्र पूरा करने और जारी राशि के उपयोग की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ की वास्तविक स्थिति कागजों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर समझी जा सकती है। निरीक्षण में सामने आई समस्याओं को शासन-प्रशासन के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा, ताकि क्षेत्र के अंतिम छोर तक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच सकें।