कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों ने श्रमदान करते हुए भोरमदेव मंदिर परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई की। लोगों ने स्वच्छता को केवल एक दिन के अभियान तक सीमित न रखकर इसे नियमित जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों को स्वच्छ रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण में आम लोगों की सक्रिय भागीदारी पर भी जोर दिया गया।
महात्मा गांधी के स्वच्छता संबंधी विचारों को स्मरण करते हुए उपस्थित लोगों से अपने घर, गांव, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की गई। इस दौरान ग्रामीणों को सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने तथा कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
वन्यजीव सप्ताह का शुभारंभ
स्वच्छता कार्यक्रम के साथ ही वन्यजीव सप्ताह का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया। इस अवसर पर अधिकारियों ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों की जानकारी दी। प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व और जैव विविधता के महत्व पर चर्चा की गई। ग्रामीणों से वन्यजीवों की सुरक्षा में वन विभाग का सहयोग करने की अपील की गई।
अधिकारियों ने कहा कि जंगल और वन्यजीवों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी वन्यजीव के दिखाई देने या किसी प्रकार की आपात स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने का आग्रह भी ग्रामीणों से किया गया।
अभयारण्य क्षेत्र का किया भ्रमण
कार्यक्रम के अंतर्गत भोरमदेव अभयारण्य क्षेत्र का भ्रमण भी किया गया। इस दौरान क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित गतिविधियों का अवलोकन किया गया। अधिकारियों और उपस्थित लोगों ने प्राकृतिक क्षेत्र को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
महिला स्व-सहायता समूहों से चर्चा
कार्यक्रम के दौरान महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्यों से भी चर्चा की गई। उनकी आजीविका गतिविधियों, वन संरक्षण में सहभागिता और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वन संसाधनों पर आधारित रोजगार की संभावनाओं के संबंध में जानकारी ली गई। महिलाओं की स्थानीय गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण में उनकी भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम के माध्यम से स्वच्छता, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का समन्वित संदेश दिया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीणों ने भोरमदेव मंदिर परिसर तथा अभयारण्य क्षेत्र की स्वच्छता और प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने में निरंतर सहयोग करने का संकल्प लिया।