वन परिक्षेत्र पेंड्रा में हिरण का शिकार, तीन आरोपी गिरफ्तार; सिंग और मांस बरामद

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के वन परिक्षेत्र पेंड्रा के अमरू बीट में एक हिरण का शिकार किए जाने का मामला सामने आया है। वन विभाग की तत्पर कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से हिरण के सिंग बरामद किए गए। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

Apr 10, 2026 - 19:33
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वन परिक्षेत्र पेंड्रा में हिरण का शिकार, तीन आरोपी गिरफ्तार; सिंग और मांस बरामद

UNITED NEWS OF ASIA. सत्यम दीक्षित। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले से वन्यजीव शिकार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां वन परिक्षेत्र पेंड्रा के अमरू बीट में एक हिरण मृत अवस्था में पाया गया। इस घटना ने वन विभाग में हड़कंप मचा दिया और तत्काल जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि हिरण का शिकार स्थानीय ग्रामीणों द्वारा किया गया है।

जानकारी के अनुसार, हिरण के शरीर से कुछ अंग गायब थे। उसका मांस निकाल लिया गया था और सिंग को काटकर छिपा दिया गया था। इस तरह की घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि यह वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ और डिप्टी रेंजर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्धों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान तुला राम गोंड (50 वर्ष) और रेन सिंह (45 वर्ष) को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया और तीसरे आरोपी के बारे में जानकारी दी।

इसके बाद वन विभाग ने सर्च ऑपरेशन चलाकर तीसरे आरोपी विश्वनाथ को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर हिरण के सिंग बरामद किए गए, जो उन्होंने छिपा कर रखे थे। सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

वन विभाग के रेंजर आई. पी. खुटे ने बताया कि यह मामला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं डीएफओ ग्रिस्मी चांद ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और विभाग भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और गश्त को और मजबूत करेगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर वन क्षेत्रों में निगरानी कितनी प्रभावी है। यदि समय रहते वन विभाग सक्रिय न होता, तो शायद यह मामला सामने भी नहीं आता। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए स्थानीय लोगों की जागरूकता और प्रशासन की सतर्कता दोनों ही जरूरी हैं।

हिरण जैसे निर्दोष वन्यजीव का इस तरह शिकार किया जाना पर्यावरण संतुलन के लिए भी खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वन्यजीवों की संख्या में तेजी से गिरावट आ सकती है।

फिलहाल वन विभाग ने आरोपियों को गिरफ्तार कर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सतत निगरानी और सख्त कानून का पालन जरूरी होगा।