प्लास्टिक कचरे को आय का स्रोत बना रहे पथर्रा के स्वच्छाग्रही, स्वच्छता के साथ पंचायत को भी आर्थिक लाभ
कबीरधाम जिले की ग्राम पंचायत पथर्रा में स्वच्छाग्रही घर-घर से प्लास्टिक, बोतल और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सूखा कचरा एकत्रित कर उसका विक्रय कर रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की इस पहल से गांव में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर हो रही है और पंचायत को आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। ग्रामीणों को गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। कबीरधाम जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम जनपद पंचायत कवर्धा अंतर्गत ग्राम पंचायत पथर्रा में दिखाई दे रहा है। यहां स्वच्छाग्रही घर-घर पहुंचकर सूखा कचरा, विशेष रूप से प्लास्टिक, बोतल और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री एकत्रित कर उसका विक्रय कर रहे हैं। इससे गांव की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होने के साथ स्वच्छाग्रहियों के लिए आय का स्रोत भी तैयार हो रहा है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि पथर्रा के स्वच्छाग्रही गांव में फैले प्लास्टिक कचरे को एकत्रित कर उसे आय के साधन में बदल रहे हैं। उन्होंने इसे स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की भावना के अनुरूप अनुकरणीय पहल बताया। स्वच्छाग्रही नियमित रूप से घर-घर जाकर प्लास्टिक, बोतल और अन्य सूखा कचरा एकत्रित करते हैं, जिसे बाद में कबाड़ के रूप में विक्रय किया जाता है।
इससे प्राप्त आय का उपयोग स्वच्छता संबंधी कार्यों में किए जाने की व्यवस्था है। इस पहल में ग्रामीणों का भी सक्रिय सहयोग मिल रहा है। ग्रामीण अब अपना सूखा कचरा गांव में आने वाले कबाड़ी को देने के बजाय सीधे ग्राम के स्वच्छाग्रहियों को सौंप रहे हैं। इससे कचरे का व्यवस्थित संग्रहण और प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है तथा गांव की स्वच्छता व्यवस्था में लगातार सुधार दिखाई दे रहा है।
चार प्रकार के कचरे के पृथक्करण के लिए जागरूकता
ग्राम पंचायत पथर्रा में ग्रामीणों को घरों में चार अलग-अलग डिब्बे रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इनमें गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष कचरे को अलग-अलग रखने की व्यवस्था शामिल है। स्वच्छाग्रही प्रतिदिन घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को कचरा पृथक्करण के महत्व की जानकारी दे रहे हैं।
ग्रामीण भी प्लास्टिक, कागज, बोतल और अन्य सूखे कचरे को अलग रखकर स्वच्छाग्रहियों को उपलब्ध करा रहे हैं। एकत्रित प्लास्टिक और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री के विक्रय से पंचायत को आर्थिक लाभ मिल रहा है। साथ ही कचरे के उचित प्रबंधन से गांव स्वच्छ और व्यवस्थित बन रहा है।
कचरे को बनाया जा सकता है आय का माध्यम
अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि कचरा केवल समस्या नहीं है, बल्कि उचित प्रबंधन के जरिए इसे आय और परिसंपत्ति के माध्यम में बदला जा सकता है। यदि अन्य ग्राम पंचायतें भी पथर्रा की तरह प्लास्टिक और सूखे कचरे के संग्रहण तथा विक्रय की व्यवस्था करें, तो स्वच्छता के साथ पंचायतों को आर्थिक रूप से भी मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने जिले के सभी जनपद पंचायतों से अपने क्षेत्रों में प्लास्टिक संग्रहण और विक्रय की व्यवस्था को प्रभावी बनाने की अपील की। इसके साथ ही प्रत्येक गांव में महिला स्व-सहायता समूहों का चयन कर उन्हें कचरा संग्रहण और प्रबंधन की गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर भी तैयार हो सकते हैं। पथर्रा की पहल स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ने का उदाहरण बन रही है।