पुरंदर मिश्रा ने कहा कि नुआखाई पर्व उत्कल (उड़ीया) समाज की आस्था, परंपरा और कृषि संस्कृति से जुड़ा एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व नई फसल के आगमन, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर अवकाश घोषित कर शासन ने न केवल एक प्रशासनिक निर्णय लिया है, बल्कि समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए एक संवेदनशील पहल भी की है।
उन्होंने आगे कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नुआखाई पर्व पर स्थानीय अवकाश घोषित किया जाना राज्य सरकार की सकारात्मक सोच और सभी समुदायों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इससे उत्कल समाज के लोगों को अपने पारंपरिक उत्सव को पूरे हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाने का अवसर मिलेगा।
विधायक मिश्रा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के सभी वर्गों, समाजों और संस्कृतियों को समान महत्व देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। विभिन्न समुदायों के पर्व-त्योहार इस राज्य की पहचान हैं और ऐसे अवसरों को मान्यता देना शासन की दूरदर्शिता को दर्शाता है। इससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सौहार्द और भाईचारा भी मजबूत होता है।
इस घोषणा के बाद उत्कल समाज में खुशी और उत्साह का माहौल है। समाज के लोगों ने इसे अपनी परंपराओं और संस्कृति के प्रति सम्मान के रूप में देखा है और सरकार के इस निर्णय की सराहना की है।
अंत में पुरंदर मिश्रा ने समस्त उत्कल समाज की ओर से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन के प्रति पुनः आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के जनभावनाओं के अनुरूप लिए गए निर्णय भविष्य में भी प्रदेश को प्रगति, एकता और सौहार्द्र के नए आयाम प्रदान करते रहेंगे।