NHMMI Hospital Raipur की चेतावनी: दर्द रहित गांठों को न करें नजरअंदाज, समय पर जांच है जरूरी

NHMMI Hospital Raipur के विशेषज्ञों ने महिलाओं को चेतावनी दी है कि स्तन या शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाली दर्द रहित गांठें भी कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती हैं। दर्द न होना बीमारी के सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है, इसलिए किसी भी नई या लंबे समय तक बनी रहने वाली गांठ की समय पर जांच कराना जरूरी है।

Feb 16, 2026 - 16:53
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NHMMI Hospital Raipur की चेतावनी: दर्द रहित गांठों को न करें नजरअंदाज, समय पर जांच है जरूरी

UNITED NEWS OF ASIA . अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | जुड़ी जागरूकता को लेकर NHMMI Hospital Raipur के विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई महिलाएं यह मान लेती हैं कि यदि किसी गांठ में दर्द नहीं है, तो वह गंभीर नहीं होगी। जबकि वास्तविकता यह है कि स्तन या शरीर के अन्य हिस्सों में बनने वाली दर्द रहित गांठें भी कैंसर के शुरुआती चरण का संकेत हो सकती हैं।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत चिकित्सकों का कहना है कि कैंसर से जुड़ी कई गांठें शुरुआती अवस्था में नसों को प्रभावित नहीं करतीं, इसलिए लंबे समय तक उनमें दर्द महसूस नहीं होता। इसी कारण महिलाएं उन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं और बीमारी का पता देर से चलता है।

दर्द न होना खतरे का संकेत न होना नहीं

विशेषज्ञ बताते हैं कि आम धारणा के विपरीत दर्द का न होना यह साबित नहीं करता कि गांठ सुरक्षित है। कैंसर की गांठें धीरे-धीरे बढ़ती हैं और प्रारंभिक अवस्था में शरीर को कोई स्पष्ट तकलीफ नहीं देतीं। ऐसे में समय पर जांच न होने पर रोग उन्नत अवस्था में पहुंच सकता है, जिससे इलाज अधिक जटिल हो जाता है।

हर गांठ कैंसर नहीं, लेकिन जांच बेहद जरूरी

डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश गांठें हार्मोनल बदलाव, सिस्ट, संक्रमण या अन्य सामान्य कारणों से भी हो सकती हैं। लेकिन केवल लक्षण देखकर यह तय कर पाना संभव नहीं होता कि गांठ सामान्य है या गंभीर। यदि कोई गांठ नई हो, सख्त महसूस हो, आकार में बढ़ रही हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

सिर्फ स्तन नहीं, शरीर के अन्य हिस्सों पर भी दें ध्यान

स्तन में गांठ की चर्चा आम है, लेकिन गर्दन, बगल, कमर या पेट में होने वाली दर्द रहित सूजन या गांठ भी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। यदि कोई गांठ स्थिर हो, असामान्य आकार की हो या समय के साथ ठीक न हो, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

40 वर्ष के बाद नियमित स्क्रीनिंग जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को नियमित रूप से मैमोग्राफी जैसी स्क्रीनिंग जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही अल्ट्रासाउंड और क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन भी बीमारी की शुरुआती पहचान में सहायक होते हैं। जिन महिलाओं के परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें डॉक्टर की सलाह से पहले ही जांच शुरू कर देनी चाहिए।

आत्म-परीक्षण भी है अहम

नियमित आत्म-परीक्षण से महिलाएं अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को जल्दी पहचान सकती हैं। हालांकि यह पेशेवर जांच का विकल्प नहीं है, लेकिन समय पर डॉक्टर तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण माध्यम जरूर है।

डर नहीं, जागरूकता जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी का डर और सामाजिक झिझक अक्सर इलाज में देरी का कारण बनती है। जबकि शुरुआती अवस्था में कैंसर का इलाज अधिक प्रभावी और कम जटिल होता है। समय पर परामर्श लेना आत्म-सुरक्षा और जिम्मेदारी का प्रतीक है।

याद रखें—
दर्द गंभीरता का भरोसेमंद पैमाना नहीं है। दर्द रहित गांठ भी खतरनाक हो सकती है। शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें—समय पर जांच ही जीवन बचा सकती है।