अजित पवार के निधन पर छत्तीसगढ़ में शोक की लहर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित नेताओं ने जताया गहरा दुःख
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री ओपी चौधरी सहित कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। इसे देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर। देश की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा और अत्यंत दुखद घटनाक्रम सामने आया, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में हुए विमान हादसे में निधन हो गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार अन्य लोगों की भी मृत्यु की सूचना है। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। छत्तीसगढ़ में भी इस समाचार के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरा दुःख देखा गया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावुक संदेश साझा किया। मुख्यमंत्री साय ने लिखा कि महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित अन्य लोगों के आकस्मिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद और हृदयविदारक है। उन्होंने कहा कि अजित पवार का सम्पूर्ण जीवन कृषक कल्याण, जनसेवा और देश के विकास के लिए समर्पित रहा। उनका असमय निधन न केवल उनके परिजनों और समर्थकों के लिए, बल्कि महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।
मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करते हुए दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिजनों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
इस दुखद घटना पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है। नेताओं ने अजित पवार को एक कर्मठ, मेहनती और अनुभवी राजनेता बताते हुए कहा कि उन्होंने सांसद, विधायक और उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए जनहित में उल्लेखनीय कार्य किए।
छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री ओपी चौधरी ने भी विमान दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अजित पवार के आकस्मिक निधन की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। यह घटना सभी के लिए गहरा आघात है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और उनके परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
अजित पवार के निधन से न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया है। यह हादसा जनसेवा और राजनीतिक क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में याद किया जाएगा।