नक्सल खौफ के बीच ग्रामीणों और शिक्षकों ने बदली तक़दीर — वनांचल का स्कूल बना जिले की मिसाल, पीएम श्री स्कूल भी पीछे

धमतरी जिले के दूरस्थ वनांचल ग्राम मासूलखोई में नक्सली खौफ और संसाधनों की कमी के बीच ग्रामीणों और शिक्षकों ने मिलकर अपने स्कूल को श्रमदान और चंदे से संवार दिया। टाइल्स, गार्डन, सोलर पेयजल, मंच और गेट निर्माण जैसे कार्य कर यह स्कूल आज पूरे जिले में एक मॉडल स्कूल के रूप में पहचान बना चुका है।

Feb 21, 2026 - 12:50
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नक्सल खौफ के बीच ग्रामीणों और शिक्षकों ने बदली तक़दीर — वनांचल का स्कूल बना जिले की मिसाल, पीएम श्री स्कूल भी पीछे

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी | कभी नक्सल गतिविधियों के खौफ में जीने वाले वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों को शायद यह एहसास नहीं था कि उनकी एक छोटी-सी पहल आने वाली पीढ़ी का भविष्य बदल देगी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सुदूर वन क्षेत्र में बसे ग्राम मासूलखोई में आज शिक्षा की एक नई मिसाल कायम हो चुकी है, जहां शिक्षक की लगन और ग्रामीणों की मेहनत ने एक साधारण से स्कूल की पूरी तस्वीर बदल दी।

यह गांव नगरी विकासखंड के अंतर्गत आता है और दुर्गम जंगलों के बीच स्थित उडंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के आसपास बसा हुआ है। यहां तक पहुंचने के लिए आज भी कच्चे, उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से स्कूल भवन सुधार, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग करते रहे, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। अंततः ग्रामवासियों ने विद्यालय के शिक्षकों के साथ बैठक कर स्वयं ही स्कूल को संवारने का बीड़ा उठा लिया।

ग्राम पंचायत करही अंतर्गत मासूलखोई के इस प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में पहले पानी, बैठने की व्यवस्था, रंग-रोगन और परिसर जैसी बुनियादी समस्याएं थीं। इसके बाद प्रधान पाठक ओम प्रकाश देव के नेतृत्व में ग्रामीणों और शिक्षकों ने चंदा एकत्र कर श्रमदान से कार्य शुरू किया।

ग्रामीणों द्वारा स्कूल भवन के भीतर चेकर टाइल्स लगाए गए, बच्चों के लिए निजी स्कूल की तर्ज पर यूनिफॉर्म की व्यवस्था की गई, पौधारोपण कर सुंदर गार्डन विकसित किया गया और लगभग 80 हजार रुपये खर्च कर क्रेडा सोलर आधारित पेयजल व्यवस्था भी स्थापित की गई। स्कूल परिसर में भारत माता की प्रतिमा, तिरंगा ध्वजारोहण हेतु अलग मंच और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए स्थायी मंच का निर्माण भी कराया गया।

विद्यालय का रंग-रोगन, स्वागत द्वार और परिसर सौंदर्यीकरण कर इसे एक नई पहचान दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि आज यह स्कूल पूरे वनांचल ही नहीं बल्कि जिले में भी एक मॉडल स्कूल के रूप में जाना जा रहा है।

इस पहल की सराहना करते हुए मनोज मरकाम, एसडीएम नगरी ने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि यदि समुदाय और शिक्षक मिलकर कार्य करें, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव संभव है।

विद्यालय के शिक्षक खरे सर ने बताया कि शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन गांव के युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। आज गांव के युवक-युवतियां भी नियमित बैठकों में शामिल होकर स्कूल विकास की योजनाओं में भाग ले रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि आने वाले समय में फसल बिक्री से प्राप्त राशि के बाद पुनः बैठक आयोजित कर स्कूल परिसर में 10 वीर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करने और विद्यालय के चारों ओर सुरक्षित अहाता निर्माण की योजना भी बनाई गई है।

गौरतलब है कि शासन द्वारा संचालित पीएम श्री स्कूल योजना के अंतर्गत जहां लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं यह वनांचल का स्कूल पूरी तरह ग्रामीण चंदे और श्रमदान से विकसित होकर आज आकर्षण का केंद्र बन चुका है। ग्रामीणों का दावा है कि संसाधनों और सौंदर्यीकरण के मामले में उनका स्कूल अब ब्लॉक स्तर के कई पीएम श्री स्कूलों से भी बेहतर दिखाई देता है।

नक्सल प्रभावित वनांचल क्षेत्र में शिक्षा के प्रति यह सामूहिक संकल्प आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गया है।