कुरडीह ग्राम पंचायत में जनमन रोड निर्माण कार्य अटका, ग्रामीणों ने सामाजिक हस्तक्षेप की लगाई गुहार

बलरामपुर जिले के चांदों क्षेत्र अंतर्गत कुरडीह ग्राम पंचायत में जनमन योजना के तहत निर्माणाधीन सड़क कार्य भूमि विवाद के चलते रुक गया है। इससे पहाड़ी कोरवा व आदिवासी बसाहट तक सड़क निर्माण अधर में लटक गया है। ग्रामीणों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए सामाजिक हस्तक्षेप की मांग की है।

Dec 13, 2025 - 11:26
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कुरडीह ग्राम पंचायत में जनमन रोड निर्माण कार्य अटका, ग्रामीणों ने सामाजिक हस्तक्षेप की लगाई गुहार

 UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, लरामपुर | रामानुजगंज जिले के चांदों क्षेत्र अंतर्गत कुरडीह ग्राम पंचायत में जनमन योजना के तहत प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य भूमि विवाद के कारण रुक जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। यह सड़क खास कुरडीह से अमटपानी होते हुए पहाड़ी कोरवा बसाहट और उपरखाड़ तक बनाई जा रही थी, जो वर्षों से दुर्गम परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित होने वाली थी।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में पहाड़ी कोरवा एवं अन्य आदिवासी परिवारों को इलाज, शिक्षा, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जनमन योजना के अंतर्गत जब इस सड़क निर्माण की शुरुआत हुई तो लोगों में उम्मीद जगी कि अब उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।

सड़क निर्माण के लिए ग्राम निवासी हकीमुद्दीन अंसारी पिता समसु‌द्दीन अंसारी तथा शिवशंकर पिता गहनु ने सामाजिक सहयोग की भावना से अपनी निजी भूमि स्वेच्छा से उपलब्ध कराई, जिसके बाद निर्माण कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा था। लेकिन इसी बीच मोजाहिद पिता मोख्तार, हेदातूल्लाह पिता मोहम्मदिन तथा रयाजुल पिता इन्ताफ ने उक्त भूमि पर अपना दावा करते हुए सड़क निर्माण कार्य को जबरन रुकवा दिया।

इस विरोध के चलते पहाड़ी कोरवा समाज एवं अन्य आदिवासी बसाहटों तक सड़क निर्माण अधर में लटक गया है। निर्माण कार्य रुकने से न केवल आवागमन बाधित हुआ है, बल्कि अन्य विकास योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग द्वारा समय रहते विवाद का समाधान नहीं किया जा रहा, जिससे जनजातीय समाज को विकास से वंचित किया जा रहा है।

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर को ज्ञापन सौंपते हुए सामाजिक हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने आग्रह किया है कि भूमि विवाद का त्वरित समाधान कर सड़क निर्माण कार्य पुनः शुरू कराया जाए, ताकि वर्षों से उपेक्षित और पिछड़े समुदायों तक विकास की पहुंच सुनिश्चित हो सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो वे प्रशासनिक स्तर पर आंदोलन और ज्ञापन देने को मजबूर होंगे। यह सड़क न केवल एक मार्ग है, बल्कि पहाड़ी कोरवा और आदिवासी समाज के लिए सम्मानजनक जीवन और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।