प्राप्त जानकारी के अनुसार, 20 फरवरी 2026 को एक प्रार्थी द्वारा थाना नारायणपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी 35 वर्षीय भतीजी और 13 वर्षीय नाबालिग बेटी मेहमानी से लौटते समय रास्ते में कुछ युवकों द्वारा उनके साथ छेड़छाड़ की गई। बाद में नाबालिग बालिका ने परिजनों को बताया कि उसके साथ गंभीर अपराध भी किया गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की और पीड़िता का विधिवत स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं एवं पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह के निर्देशन में चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया था। गठित टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना से जुड़े सभी संदिग्धों की पहचान कर कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस के अनुसार हिरासत में लिए गए 9 आरोपियों में एक 17 वर्षीय विधि से संघर्षरत बालक भी शामिल है। सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है। बालिग आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने की प्रक्रिया की जा रही है, जबकि विधि से संघर्षरत बालक को नियमानुसार बाल संप्रेषण गृह भेजा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि घटना के बाद पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने और मामले को दबाने के प्रयास किए गए थे। इस पहलू को भी जांच में शामिल किया गया है और संबंधित धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है।
पूरे अभियान में निरीक्षक राकेश कुमार यादव, सहायक उप निरीक्षक, प्रधान आरक्षक एवं अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनके समन्वय से सभी आरोपियों को शीघ्र चिन्हित कर पकड़ा गया।
इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि नाबालिग बालिकाओं और महिलाओं से संबंधित अपराधों को लेकर जशपुर पुलिस अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी प्रकार की आपराधिक घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।