विश्व आदिवासी दिवस पर मोहला-मानपुर में दिखी आदिवासी संस्कृति की भव्य झलक, हजारों की संख्या में जुटा समाज
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मोहला-मानपुर जिला मुख्यालय में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे। मांदर, गीत-संगीत और नृत्य के बीच महापुरुषों एवं पूर्वजों की पूजा-अर्चना की गई। सर्व आदिवासी समाज ने 12 सूत्रीय मांगों को लेकर रैली निकाली और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख, मानपुर l विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मोहला-मानपुर जिला मुख्यालय में रविवार को आदिवासी संस्कृति, परंपरा, सामाजिक एकजुटता और अधिकारों की आवाज का भव्य संगम देखने को मिला। जिले के वनांचल सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुए। बारिश के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी संख्या में समाज के लोग कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।
कार्यक्रम स्थल पर ढोल-मांदर की थाप, पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य ने पूरे वातावरण को आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया। लाल लक्ष्मेंद्र शाह सहित सामाजिक पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों का मांदर की थाप के साथ स्वागत किया गया। महिला, पुरुष और युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर आदिवासी जीवनशैली और समृद्ध परंपराओं की झलक प्रस्तुत की।
महापुरुषों और पूर्वजों की पूजा-अर्चना से शुरुआत
विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी समाज के महापुरुष लाल श्याम शाह महाराज सहित अन्य महापुरुषों और पूर्वजों की पूजा-अर्चना के साथ हुई। समाज के लोगों ने अपने गौरवशाली इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
बारिश के बीच भी कार्यक्रम में समाज की मौजूदगी लगातार बनी रही। आयोजन में सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
हक और अधिकारों को लेकर उठी आवाज
कार्यक्रम में संजीत ठाकुर ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र और आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। जिला पंचायत सदस्य नरसिंह भंडारी ने अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों और आदिवासियों की जमीनों पर कथित रूप से नजर रखने वाले जमीन दलालों का मुद्दा उठाया।
मोहला-मानपुर विधायक इंद्रशाह मंडावी ने आदिवासी संस्कृति, बोली और भाषा के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए रखना जरूरी है और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने की आवश्यकता है।
सर्व आदिवासी समाज ने दिया एकजुटता का संदेश
सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष तुलाराम पिस्दा ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के माध्यम से समाज ने एक मंच पर एकजुट होकर अपनी शक्ति और एकता का संदेश दिया है। उन्होंने इस दिवस को समाज के लिए एकता दिवस के रूप में मनाए जाने की बात कही।
उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया और कहा कि युवा प्रभाग की ओर से इस विषय को लेकर सर्व आदिवासी समाज के समक्ष मांग रखी गई है। उन्होंने कहा कि समाज इस मामले में नियमानुसार उचित कार्रवाई करेगा।
12 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सर्व आदिवासी समाज ने हजारों की संख्या में रैली निकाली। रैली गोंडवाना भवन से शुरू होकर लाल श्याम शाह बस स्टैंड होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची। यहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों में कार्रवाई, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार, पांचवीं अनुसूची के संवैधानिक प्रावधानों का पालन और स्थानीय शिक्षित बेरोजगारों को भर्ती में प्राथमिकता देने सहित विभिन्न मांगें शामिल थीं।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इन मांगों को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन के समक्ष आवाज उठाई जा रही है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर समाज ने शासन और प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द उचित निर्णय लेने की अपील की।
संस्कृति, परंपरा और अधिकारों का संगम
मोहला-मानपुर में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस का कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा। एक ओर मांदर, पारंपरिक गीत, नृत्य और वेशभूषा के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर वनाधिकार, जमीन, रोजगार, जाति प्रमाण पत्र और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर समाज की आवाज भी मजबूती से उठी।
कार्यक्रम में विधायक इंद्रशाह मंडावी, लाल लक्ष्मेंद्र शाह, तुलाराम पिस्दा, नेहरू कुमेटी, रमेश हिंडामे, संजीत ठाकुर, एस. आर. नायक, सुधा शाह कुंजाम, कन्हैया राजपूत, पप्पू सोनी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक पदाधिकारी और समाज के लोग मौजूद रहे।
विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम मोहला-मानपुर में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, एकता और अपने हक-अधिकारों के प्रति जागरूकता का महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया।