प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की दूरदर्शी सोच और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों का सकारात्मक असर जिले में साफ नजर आ रहा है। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे और अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी की सतत मॉनिटरिंग और प्रभावी नेतृत्व ने इस बदलाव को गति दी है।
जनवरी से मार्च 2026 के बीच अस्पताल में कुल 1559 मरीजों का सफल उपचार किया गया, जो क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 375 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच की गई, जबकि 151 एनीमिया से पीड़ित मरीजों का उपचार किया गया। इसके अलावा 380 सोनोग्राफी जांचें और 50 सड़क दुर्घटना के मामलों का सफल इलाज किया गया।
प्रसव सेवाओं के क्षेत्र में भी अस्पताल ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस दौरान 238 सामान्य प्रसव और 25 सिजेरियन डिलीवरी सफलतापूर्वक संपन्न की गईं। इसके साथ ही 60 जनरल सर्जरी, 18 ऑर्थोपेडिक और 15 ईएनटी से जुड़े मामलों का उपचार किया गया।
यह उपलब्धियां इस बात का संकेत हैं कि अब अस्पताल में गंभीर और जटिल बीमारियों का इलाज भी स्थानीय स्तर पर ही संभव हो रहा है। पहले जहां मरीजों को छोटी-छोटी जांच और इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, वहीं अब उन्हें अपने जिले में ही बेहतर और सुलभ उपचार मिल रहा है।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के अनुसार, यह सफलता टीम वर्क, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी का परिणाम है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में लगातार सुधार किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।
सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे की नियमित मॉनिटरिंग और मार्गदर्शन से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ी है। इसके चलते मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हुई है और लोग सरकारी अस्पतालों पर अधिक भरोसा जताने लगे हैं।
एमसीबी जिला अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है। शासन की योजनाओं और स्वास्थ्य विभाग की मेहनत से यहां की चिकित्सा व्यवस्था में जो बदलाव आया है, वह आने वाले समय में और बेहतर परिणाम देने की उम्मीद जगाता है।
कुल मिलाकर, मनेंद्रगढ़ का यह अस्पताल अब क्षेत्र के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है, जहां लोगों को बेहतर, सुलभ और भरोसेमंद इलाज मिल रहा है।