220 बिस्तर सिविल अस्पताल मनेन्द्रगढ़ में 4 साल पुरानी पलक की गांठ का सफल ऑपरेशन
मनेन्द्रगढ़ के 220 बिस्तर सिविल चिकित्सालय में 19 वर्षीय छात्र की दाहिनी आंख की निचली पलक में चार वर्षों से मौजूद गांठ का सफल ऑपरेशन किया गया। निकाले गए ऊतक को अंतिम जांच के लिए हिस्टोपैथोलॉजी विभाग भेजा गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, कोरिया l 220 बिस्तर सिविल चिकित्सालय, मनेन्द्रगढ़ के नेत्र रोग विभाग में एक 19 वर्षीय छात्र की दाहिनी आंख की निचली पलक में पिछले लगभग चार वर्षों से मौजूद गांठ का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत की गई इस शल्यक्रिया के दौरान किसी प्रकार की जटिलता सामने नहीं आई और मरीज की स्थिति पूरी तरह सामान्य रही। इस सफल उपचार से छात्र को लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार ग्राम देवाडांड निवासी राज कुमार वर्तमान में आदिवासी पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में रहकर महाविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं। उनकी दाहिनी आंख की निचली पलक में करीब चार वर्ष पहले एक छोटी गांठ बनी थी, जो समय के साथ धीरे-धीरे आकार में बढ़ती गई। इस कारण उन्हें लगातार असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। छात्र ने पहले नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार भी कराया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के कारण समस्या बनी रही।
करीब एक सप्ताह पहले राज कुमार उपचार के लिए 220 बिस्तर सिविल चिकित्सालय, मनेन्द्रगढ़ के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी पहुंचे। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ ने विस्तृत परीक्षण कर पलक में मौजूद गांठ का चिकित्सकीय मूल्यांकन किया। जांच के बाद चिकित्सकों ने शल्यक्रिया के माध्यम से गांठ निकालने और उसके ऊतक की हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच कराने का निर्णय लिया।
ऑपरेशन से पहले मरीज की सभी आवश्यक रक्त जांच कराई गई, जिनकी रिपोर्ट सामान्य पाई गई। साथ ही आंख की दृष्टि क्षमता और पलक की कार्यप्रणाली का भी परीक्षण किया गया, जो पूरी तरह सामान्य रही। सभी जांच पूरी होने के बाद 30 जुलाई 2026 को स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत राइट लोअर आईलिड मास एक्सीजन (Right Lower Eyelid Mass Excision) की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई। पूरी शल्यक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और मरीज ने इसे अच्छी तरह सहन किया।
ऑपरेशन के दौरान निकाले गए ऊतक के नमूने को 10 प्रतिशत फॉर्मालिन में सुरक्षित कर हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण (एचपीई) के लिए पैथोलॉजी विभाग भेजा गया है। चिकित्सकों के अनुसार गांठ की वास्तविक प्रकृति और अंतिम निदान की पुष्टि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही की जा सकेगी। रिपोर्ट के आधार पर यदि आवश्यक हुआ तो आगे की चिकित्सा प्रक्रिया भी तय की जाएगी।
इस सफल शल्यक्रिया में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मिर्रे ने ऑपरेटिंग सर्जन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें स्टाफ नर्स रीता मिश्रा और नेत्र सहायक रीमा सिंह का सहयोग प्राप्त हुआ। पूरी टीम ने समन्वय के साथ शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि यह ऑपरेशन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन तथा 220 बिस्तर सिविल चिकित्सालय के अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के संरक्षण में संपन्न हुआ। अस्पताल में उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं के कारण मरीज को उपचार के लिए किसी बड़े शहर या अन्य चिकित्सा संस्थान जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
यह सफलता दर्शाती है कि मनेन्द्रगढ़ का 220 बिस्तर सिविल चिकित्सालय अब स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा और शल्य सेवाएं प्रभावी ढंग से उपलब्ध करा रहा है। इससे क्षेत्र के मरीजों को समय पर उपचार मिलने के साथ आर्थिक और समय की बचत भी हो रही है। अब सभी की निगाहें हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट पर हैं, जिसके आधार पर मरीज के आगे के उपचार की दिशा तय की जाएगी।