UNITED NEWS OF ASIA. आकाश सोनकर, अंबिकापुर l 19 वर्षीय बीए प्रथम वर्ष की छात्रा की मौत के मामले में गांधीनगर पुलिस ने NSUI नेता ज्ञान तिवारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप में कार्रवाई की है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। मामले में छात्रा की सहेलियों की ओर से परिजनों को दी गई जानकारी के बाद ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप सामने आए थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए मृतका का मोबाइल फोन भी जब्त किया है।
जानकारी के अनुसार अंतरा शाह मूल रूप से गोदरीपारा, चिरमिरी की निवासी थी और अंबिकापुर के पटपरिया इलाके में अपने जीजा निलेश गुप्ता के घर रहकर पीजी कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। परिजनों के मुताबिक 10 सितंबर को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे वह कॉलेज से घर लौटी थी। शाम को परिवार के साथ भोजन करने के बाद वह सो गई। अगले दिन सुबह घर में छात्रा की मौत की जानकारी सामने आई। घटना की सूचना मिलने पर गांधीनगर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
घटना के अगले दिन छात्रा की कुछ सहेलियों ने परिजनों को कथित तौर पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। सहेलियों के अनुसार NSUI नेता ज्ञान तिवारी, निवासी मुक्तिपारा गांधीनगर, लंबे समय से अंतरा को परेशान कर रहा था। आरोप है कि ज्ञान तिवारी के पास छात्रा से जुड़े कुछ निजी चैट और वीडियो थे और वह उन्हें परिवार के सामने सार्वजनिक करने की धमकी देकर छात्रा पर दबाव बना रहा था। परिजनों के अनुसार इसी कथित ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना के कारण छात्रा काफी तनाव में थी।
सहेलियों से मिली जानकारी के बाद मृतका के मामा ने गांधीनगर थाने में ज्ञान तिवारी के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने मृतका का मोबाइल फोन भी जब्त किया है, जिससे मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा सके। गांधीनगर थाने में आत्महत्या के लिए प्रेरित करने से संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
मामला सामने आने के बाद NSUI की ओर से भी संगठनात्मक कार्रवाई की गई है। गहिरा गुरु विश्वविद्यालय NSUI प्रभाग, अंबिकापुर की ओर से जारी पत्र में ज्ञान तिवारी को प्राथमिक सदस्यता के साथ छात्र संगठन और अन्य संगठनात्मक पदों से तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई है।
फिलहाल पुलिस मामले में सामने आए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। ब्लैकमेलिंग से जुड़े दावों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।