धमतरी मॉडल बना देश के लिए प्रेरणा, औषधीय पौधों की खेती से महिलाओं की बदली तकदीर
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में औषधीय एवं सुगंधीय पौधों की खेती ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का नया मॉडल बनकर उभरी है। अनुपयोगी भूमि पर खस, ब्राह्मी, लेमनग्रास और अन्य औषधीय फसलों की खेती से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब इस पहल का विस्तार 500 एकड़ तक करने की तैयारी है।
UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला आज औषधीय एवं सुगंधीय पौधों की खेती के जरिए ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है। राज्य औषधीय पादप बोर्ड, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से अनुपयोगी भूमि को आय का स्रोत बनाया गया है। इस पहल से सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है।
राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा रायपुर सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सिंदूरी, सतावर और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन पौधों की खेती से महिलाओं को घर बैठे नियमित आय प्राप्त हो रही है। धमतरी जिले में महिलाओं ने अनुपयोगी भूमि और नालों के पानी का उपयोग कर औषधीय पौधों की सफल खेती कर यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार के जरिए आर्थिक समृद्धि हासिल की जा सकती है।
धमतरी लंबे समय से धान उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन सीमित आय, प्राकृतिक जोखिम और बंजर भूमि की समस्या किसानों के सामने चुनौती बनी हुई थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष 2025 में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने औषधीय एवं सुगंधीय फसलों की खेती को बढ़ावा देने की योजना शुरू की। इस अभियान का उद्देश्य केवल खेती तक सीमित नहीं था, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाना भी था।
योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को केंद्र में रखकर खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराई गई। महिलाओं को विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और नियमित फील्ड सपोर्ट दिया गया। साथ ही उत्पादों की शत-प्रतिशत बाय-बैक व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे किसानों और महिला समूहों को विपणन की चिंता नहीं करनी पड़ी।
पहले चरण में लगभग 150 एकड़ भूमि पर 200 महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को इस योजना से जोड़ा गया। इसमें करीब 80 एकड़ में खस, 20 एकड़ में ब्राह्मी, 10 एकड़ में बच और 40 एकड़ में लेमनग्रास, पामारोजा तथा पचौली की खेती की गई। कुछ ही समय में इन फसलों से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की आय होने लगी। महिलाओं ने इस अतिरिक्त आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, कृषि उपकरण खरीदने और छोटे व्यवसाय शुरू करने में किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति के साथ सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ा।
महिला कृषक समूहों की सदस्य सत्या ढीमर, पूना साहू और कुंती ढीमर का कहना है कि इस योजना ने उनकी आय बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। अब वे बैंकिंग, समूह प्रबंधन और उद्यमिता में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वहीं किसान अशोक नेताम के अनुसार कम पानी वाली भूमि में लेमनग्रास और खस जैसी फसलें उम्मीद से अधिक लाभदायक साबित हुई हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए 'लखपति दीदी' अभियान पर विशेष जोर दे रही है। इसी कड़ी में धमतरी का औषधीय खेती मॉडल महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है। सरकार अब इस योजना का विस्तार 500 एकड़ तक करने की तैयारी कर रही है, जिससे 500 से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
धमतरी मॉडल की एक और खासियत यह है कि इसमें केवल खेती ही नहीं, बल्कि संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है। कुरूद विकासखंड के कोटगांव और पचपेड़ी में औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है। भविष्य में आवश्यक तेल निष्कर्षण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की दिशा में भी कार्य किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
धमतरी की इस अभिनव पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित महाकुंभ-2025 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और कृषि जागरण द्वारा जिले को औषधीय एवं सुगंधीय पौधों की खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। इसके बाद कई राज्यों के किसान और अधिकारी इस मॉडल का अध्ययन करने धमतरी पहुंच चुके हैं।
औषधीय खेती आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ब्राह्मी, बच और लेमनग्रास जैसी फसलें जैव विविधता बढ़ाने, भूमि संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में सहायक हैं। यही कारण है कि धमतरी मॉडल आज ग्रामीण नवाचार, महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर देशभर में नई पहचान बना रहा है।