चावल पापड़ उद्योग से बनीं आत्मनिर्भर, विद्यावती चौधरी बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा
दुर्ग जिले के ग्राम ननकट्ठी की विद्यावती चौधरी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर चावल पापड़ उद्योग और सिलाई केंद्र की शुरुआत की। आज उनका समूह न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है, बल्कि गांव की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का उदाहरण भी बन गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की अनेक प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक सफलता की कहानी दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत ननकट्ठी की विद्यावती चौधरी की है, जिन्होंने अपने प्रयास, मेहनत और नेतृत्व क्षमता के बल पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।
आराध्या स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष और एफएलसीआरपी के रूप में कार्यरत विद्यावती चौधरी ने समूह की बचत और ऋण राशि का उपयोग करते हुए चावल पापड़ निर्माण एवं सिलाई केंद्र की शुरुआत की। शुरुआत में यह कार्य छोटे स्तर पर किया गया था, जहां समूह की महिलाएं अपने घरों और आंगनों में मिलकर पापड़ तैयार करती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने गुणवत्ता और मेहनत को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बनाया।
समूह की महिलाएं प्रतिदिन एकत्रित होकर चावल पापड़ तैयार करती हैं। उनके उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद के कारण स्थानीय बाजारों में मांग लगातार बढ़ने लगी। धीरे-धीरे यह छोटा प्रयास एक सफल ग्रामीण उद्यम में परिवर्तित हो गया। वर्तमान में समूह द्वारा निर्मित चावल पापड़ स्थानीय बाजारों में अच्छी पहचान बना चुके हैं और इससे प्रतिमाह हजारों रुपये की आय अर्जित की जा रही है।
इस उद्यम का लाभ केवल विद्यावती चौधरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़ी कई महिलाओं के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। नियमित आय प्राप्त होने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति अब पहले की तुलना में अधिक सहज हो गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे सामाजिक तथा पारिवारिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
विद्यावती चौधरी का मानना है कि सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन से कोई भी महिला आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पूरे समुदाय के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
आज ननकट्ठी गांव की महिलाएं अपने उत्पादों के साथ गर्व से खड़ी हैं और महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बन चुकी हैं। विद्यावती चौधरी की यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन और सामूहिक सहयोग से आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।
यह सफलता कहानी बताती है कि स्वयं सहायता समूहों की ताकत, सामूहिक प्रयासों और बिहान योजना के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होकर "लखपति दीदी" बनने की दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकती हैं।