कुंडाली कलां में स्किल इंडिया के तहत 10 दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
छिंदवाड़ा जिले के परासिया विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत कुंडाली कलां में स्किल इंडिया के तहत 10 दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम 29 दिसंबर 2025 को संपन्न हुआ। इसमें 30 उन्नतशील किसानों ने नर्सरी, पौध उत्पादन, फसल रोग एवं निदान, जैविक और प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
UNITED NEWS OF ASIA. वीरेन्द्र यादव, छिंदवाड़ा। परासिया विकासखंड के ग्राम पंचायत कुंडाली कलां में 29 दिसंबर 2025 को स्किल इंडिया के तहत 10 दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम के 30 उन्नतशील किसानों ने भाग लिया। किसानों को नर्सरी से लेकर पौध उत्पादन, फसल रोग, निदान और जैविक खेती के आधुनिक तरीकों पर प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ और आईटीसी के तकनीकी विशेषज्ञों ने किसानों को विभिन्न प्रकार की विशुद्ध खेती के बारे में जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन दीदी लक्ष्मी घागरे ने खेत में नैनो यूरिया और तरल उर्वरकों के प्रयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इससे किसानों को उर्वरक के सही उपयोग और फसल उत्पादन में वृद्धि के तकनीकी पहलुओं की प्रत्यक्ष जानकारी मिली।
प्रशिक्षण के दौरान औषधि पौधे और सुगंधित पौधों की खेती, प्राकृतिक खेती और जैविक खेती के बारे में मास्टर ट्रेनर सुंदरलाल नागवंशी एवं वीरेंद्र यादव ने विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन विपिन सुजाने ने किया और अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि वे भविष्य में प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाकर अपने परिवार के लिए स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक भोजन सुनिश्चित करेंगे।
उन्नतशील किसानों जैसे मोहनलाल बेलवंशी, उमेश कुमार गोहिया, बी एल बेलवंशी, भाऊराव ठाकरे, केवल प्रसाद चीतलवार, अशोक कुमार धुर्वे, मिश्रा चंद्रपुरी, हरचंद चंद्रपुरी, साहदेव करड़े, गगन ठाकरे, गुरु दयाल बेलवंशी, संगीता नागवंशी, प्रियंका नागवंशी आदि ने अपने अनुभव साझा किए और इस प्रशिक्षण से मिली जानकारी को अपने खेतों में लागू करने का संकल्प लिया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और जैविक उत्पादन के तरीकों से अवगत कराना है, ताकि वे उत्पादन बढ़ा सकें और अपने परिवार को पोषक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध करवा सकें। कार्यक्रम के दौरान किसानों की उत्सुक भागीदारी और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया ने इसे अत्यंत सफल और लाभकारी बनाया।
कुल मिलाकर यह कार्यक्रम न केवल किसानों के कौशल को बढ़ाने में मददगार रहा, बल्कि उन्हें प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित भी किया।