छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने झीरम नरसंहार मामले में नार्को टेस्ट के लिए आयोग से समंस जारी करने की मांग की

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी ने झीरम नरसंहार वृहद् जाँच आयोग के चेयरमैन और सदस्य को आवेदन पत्र भेजकर प्रमुख नेताओं का नार्को टेस्ट कराने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि बारह साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी झीरम हत्याकांड का सच जनता के सामने नहीं आया है।

Dec 30, 2025 - 12:58
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छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने झीरम नरसंहार मामले में नार्को टेस्ट के लिए आयोग से समंस जारी करने की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह,रायपुर छत्तीसगढ़। झीरम नरसंहार मामले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी ने वृहद् जाँच आयोग के चेयरमैन सतीश कुमार अग्निहोत्री और सदस्य गुलाम मिन्हाजुद्दीन को लिखित आवेदन पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। पत्र के माध्यम से उन्होंने प्रमुख राजनीतिक नेताओं  जगत प्रकाश नड्डा,विष्णुदेव साय, डॉ रमन सिंह,  किरण देव,  भूपेश बघेल,  अमित जोगी,  कवासी लखमा एवं ननकी राम कंवर के नार्को टेस्ट करवाने हेतु समंस जारी करने का अनुरोध किया।

विकास तिवारी ने कहा कि झीरम घाटी हत्याकांड का सच अब देश और छत्तीसगढ़ की जनता के सामने आना चाहिए। इस हत्याकांड की बारह वर्ष से अधिक पुरानी घटनाओं के बावजूद आज तक सच्चाई का पूर्ण खुलासा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि शहीदों के परिजन अब भी यह जानने के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं कि उनकी संतानों की शहादत के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और कौन जिम्मेदार थे।

कांग्रेस प्रवक्ता ने अपने आवेदन में विस्तृत साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य प्रासंगिक प्रमाण आयोग को भेजे हैं, ताकि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि इस मामले में उच्च स्तरीय, पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे में लाया जाए।

विकास तिवारी ने यह भी कहा कि राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों के नार्को टेस्ट से जनता के सामने झीरम हत्याकांड के बारे में वास्तविक तथ्य स्पष्ट होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस हत्याकांड की लंबित जाँच और तथ्य का खुलासा लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्याय के प्रति विश्वास को मजबूत करेगा।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का मानना है कि न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित व्यक्तियों के परीक्षण किए जाने चाहिए। शहीद परिवारों की पीड़ा और उनकी मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बार-बार स्थगित हुई जांच से जनता में न्याय व्यवस्था के प्रति असंतोष बढ़ रहा है और इसे शीघ्रता से समाप्त किया जाना आवश्यक है।

कुल मिलाकर विकास तिवारी की यह पहल झीरम नरसंहार की सच्चाई को उजागर करने और शहीद परिवारों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।