कोरबा में 12 फीट लंबे विशालकाय किंग कोबरा का सफल रेस्क्यू, गांव में मची थी दहशत
कोरबा जिले के बालको क्षेत्र के तिलईदाड़ गांव में बंद पड़े सेप्टिक टैंक से 12 फीट लंबे किंग कोबरा का सफल रेस्क्यू किया गया। वन विभाग और नोवा नेचर रेस्क्यू टीम की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया।
UNITED NEWS OF ASIA. भूपेंद्र साहू, कोरबा | जिले के बालको परिक्षेत्र अंतर्गत तिलईदाड़ गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक बंद पड़े सेप्टिक टैंक में करीब 12 फीट लंबा विशालकाय किंग कोबरा गिरा हुआ पाया गया। जैसे ही घर के सदस्यों की नजर इस खतरनाक विषधर पर पड़ी, उनके होश उड़ गए। देखते ही देखते गांव में दहशत का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग और नोवा नेचर रेस्क्यू टीम को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही बालको परिक्षेत्र के वन अमले के साथ नोवा नेचर की प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और पूरे धैर्य एवं सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। चूंकि किंग कोबरा अत्यंत विषैला और आक्रामक हो सकता है, इसलिए सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया।
रेस्क्यू टीम के अनुसार किंग कोबरा पिछले कुछ दिनों से बंद पड़े सेप्टिक टैंक में मौजूद था। अंधेरे और सुरक्षित स्थान के कारण वह वहीं छिपा हुआ था। टीम ने विशेष उपकरणों और तकनीक की सहायता से काफी मशक्कत के बाद इस विशालकाय सांप को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला और थैले में डालकर रेस्क्यू करने में सफलता प्राप्त की। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि किंग कोबरा दुनिया का सबसे लंबा विषैला सांप माना जाता है, जिसकी लंबाई 20 फीट या उससे भी अधिक हो सकती है। यह मुख्य रूप से अन्य सांपों को खाकर जीवित रहता है, जिससे प्रकृति में सांपों की आबादी संतुलित रहती है। किंग कोबरा दुनिया का एकमात्र ऐसा सांप है जिसकी मादा अपने अंडों के लिए पत्तों से घोंसला बनाती है और लगभग तीन महीने तक उसकी रक्षा करती है, जो इसके अद्वितीय मातृत्व व्यवहार को दर्शाता है।
वन विभाग और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी सांप दिखाई दे, तो उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें। किंग कोबरा बिना वजह मनुष्य पर हमला नहीं करता, लेकिन खतरा महसूस होने पर वह आक्रामक हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित और सही कदम है।