43 शिक्षकों से 10–12 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश, अंतरजिला गिरोह के 5 आरोपी गिरफ्तार
कोंडागांव पुलिस ने पर्सनल लोन के नाम पर 43 शिक्षकों से 10 से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले अंतरजिला गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए विभिन्न बैंकों से मल्टीपल लोन स्वीकृत कराकर शिक्षकों को ठगी का शिकार बनाया।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव l पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर शिक्षकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरजिला गिरोह का कोंडागांव पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फरसगांव थाना में आयोजित प्रेसवार्ता में पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरोह ने जिले के 43 शिक्षकों को झांसा देकर विभिन्न बैंकों से मल्टीपल पर्सनल लोन स्वीकृत कराए और करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी फरसगांव, केशकाल, बड़ेडोंगर, धनोरा और विश्रामपुरी सहित विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षकों के संपर्क में आए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे अलग-अलग बैंकों से एक साथ पर्सनल लोन स्वीकृत कराएंगे और उसकी मासिक किस्तों (ईएमआई) का भुगतान भी स्वयं करेंगे। इस झांसे में आकर कई शिक्षकों ने दस्तावेज उपलब्ध करा दिए।
जांच में सामने आया कि लोन स्वीकृत होने के बाद आरोपियों ने पीड़ित शिक्षकों को कुल राशि का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दिया, जबकि शेष 60 प्रतिशत रकम अपने और सहयोगियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली। शुरुआती कुछ समय तक सब सामान्य दिखाया गया, लेकिन बाद में ईएमआई जमा नहीं होने पर शिक्षकों को ठगी का पता चला और मामला पुलिस तक पहुंचा।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह ने कई मामलों में शिक्षकों के फर्जी आधार कार्ड तैयार किए, जिनमें पता बदलकर नए दस्तावेज बनाए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीएफसी, आईडीबीआई, यस बैंक और चोलामंडलम सहित कई वित्तीय संस्थानों से एक साथ कई लोन स्वीकृत कराए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम गठित की गई। लगभग तीन माह तक बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। जांच के आधार पर पुलिस ने अंबिकापुर, जशपुर और सारंगढ़ में दबिश देकर शिवशंकर दास, दिलीप कुमार सोनी, विरेन्द्र तिर्की, श्यामसुन्दर जांगड़े और अंशुमान सिंह को गिरफ्तार किया। इनमें एक आरोपी पहले से अंबिकापुर जेल में बंद था, जिसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में बैंकिंग दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित पीड़ितों की भी जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी। यह कार्रवाई जिले में संगठित आर्थिक अपराधों के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है।