आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सतर्कता से कोहपानी में टला बाल विवाह, प्रदीपन संस्था और प्रशासन की अहम भूमिका
छिंदवाड़ा जिले के हर्रई ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोहपानी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सूझबूझ और प्रदीपन संस्था की तत्परता से एक 15 वर्षीय बालिका का बाल विवाह रोका गया। पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से समय रहते कार्रवाई की गई।
UNITED NEWS OF ASIA. वीरेंद्र यादव, छिंदवाडा। दवाड़ा जिले के हर्रई विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोहपानी में एक सराहनीय पहल देखने को मिली, जहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सूझबूझ और प्रदीपन संस्था के सक्रिय सहयोग से एक नाबालिग बालिका का बाल विवाह समय रहते रोक दिया गया। यह घटना 6 अप्रैल, सोमवार की है, जब स्थानीय स्तर पर मिली सूचना के आधार पर तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों ने मिलकर इस गंभीर सामाजिक समस्या पर रोक लगाई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम कोहपानी में एक 15 वर्षीय बालिका का विवाह किए जाने की तैयारी चल रही थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को इस संबंध में सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने बिना देर किए प्रदीपन संस्था के कार्यकर्ताओं को अवगत कराया। संस्था ने तत्परता दिखाते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों को तुरंत सक्रिय किया गया।
संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जिस बालिका का विवाह कराया जा रहा था, उसकी उम्र मात्र 15 वर्ष है और उसकी जन्म तिथि 7 जुलाई 2010 दर्ज पाई गई। यह बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006/2012 के तहत पूर्णतः अवैध है।
मौके पर उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने बालिका के परिवारजनों और रिश्तेदारों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही टेंट संचालक सहित आयोजन से जुड़े अन्य लोगों को भी कानून के तहत संभावित दंड के बारे में अवगत कराया गया। अधिकारियों की समझाइश और सख्त रुख के चलते परिवार ने विवाह रोकने पर सहमति जताई।
इस दौरान सभी संबंधित पक्षों की उपस्थिति में वचन पत्र और पंचनामा तैयार किया गया, जिसमें भविष्य में बालिका का विवाह कानूनी उम्र पूरी होने के बाद ही करने का आश्वासन लिया गया।
इस पूरे अभियान में प्रदीपन संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था के जिला समन्वयक रामनाथ उइके, सीएसडब्ल्यू मनोज उइके, मनोज इनवाती और रेखा मरावी ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसके अलावा थाना हर्रई से बाल संरक्षण अधिकारी भद्दू सिंह मरावी, महिला एवं बाल विकास विभाग से पर्यवेक्षक गुंजा उइके तथा ग्राम के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद रहे।
इस कार्रवाई के दौरान लगभग 56 लोग उपस्थित थे, जिन्हें बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूक किया गया। यह घटना समाज में जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की एक मिसाल बनकर सामने आई है।
बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि यह बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर प्रभाव डालता है। ऐसे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रशासन और सामाजिक संगठनों के इस संयुक्त प्रयास से एक बालिका का भविष्य सुरक्षित हुआ है। यह घटना समाज के लिए एक संदेश है कि यदि समय रहते जागरूकता और जिम्मेदारी दिखाई जाए, तो इस तरह की कुप्रथाओं को रोका जा सकता है।