छत्तीसगढ़ बनेगा मखाना हब, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने लिंगाडीह मखाना सेंटर का किया निरीक्षण
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने रायपुर जिले के लिंगाडीह में मखाना सेंटर का निरीक्षण कर छत्तीसगढ़ को मखाना हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणा की। रायपुर, धमतरी, गरियाबंद और बालोद को जोड़कर मखाना सर्किट विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ को मखाना उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने 6 अप्रैल 2026 को रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत लिंगाडीह स्थित मखाना सेंटर का निरीक्षण किया और प्रदेश को “मखाना हब” के रूप में विकसित करने की घोषणा की।
मंत्री ने इस दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां मखाना उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। विशेष रूप से रायपुर, धमतरी, गरियाबंद और बालोद जिलों में मखाना खेती की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने इन क्षेत्रों को जोड़कर “मखाना सर्किट” के रूप में विकसित करने पर जोर दिया, जिससे उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक एक मजबूत व्यवस्था तैयार की जा सके।
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में आरंग और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 50 से 60 हेक्टेयर भूमि में मखाना की खेती की जा रही है। यहां ग्रेड-6 गुणवत्ता का मखाना उत्पादन हो रहा है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है। इससे किसानों की आय में वृद्धि की संभावना भी बढ़ गई है।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने मखाना सेंटर में तैयार उत्पादों का अवलोकन किया और स्वयं मखाना चखकर उसकी गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए और आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाए, ताकि उन्हें अधिक लाभ मिल सके।
मंत्री नेताम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कृषि विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर गठित मखाना बोर्ड की योजनाओं से राज्य के किसानों को जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मखाना उत्पादन में प्रसंस्करण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कच्चे बीज की तुलना में प्रोसेस्ड मखाना बाजार में अधिक कीमत पर बिकता है। एक किलोग्राम बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम मखाना पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है। इससे किसानों को बेहतर लाभ प्राप्त हो सकता है।
मंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों को इस क्षेत्र से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। वर्ष 2026-27 के लिए 2 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है, जिसके माध्यम से उत्पादन क्षेत्र का विस्तार और आवश्यक अधोसंरचना का विकास किया जाएगा।
अपने दौरे के दौरान मंत्री ने खरोरा क्षेत्र के मधेपुरा और बुढ़ेरा ग्राम का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों का अवलोकन कर आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। साथ ही टिशू कल्चर लैब और बीज विकास केंद्र का निरीक्षण कर उन्नत कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
यह पहल छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आय के नए स्रोत खोलने के साथ ही राज्य को देश के प्रमुख मखाना उत्पादक क्षेत्रों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।