किशनपुर पंचायत में सचिव पर कमीशनखोरी और गबन के आरोप, मारपीट विवाद के बाद कार्रवाई की मांग तेज

महासमुंद जिले के पिथौरा जनपद अंतर्गत किशनपुर ग्राम पंचायत में पंचायत सचिव श्याम सुंदर नायक पर कमीशनखोरी, गबन और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पंचायत बैठक के दौरान मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज और धमकी के आरोपों के बाद मामला पुलिस, जिला प्रशासन और एसटी/एससी थाने तक पहुंच गया है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच, सचिव के निलंबन और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Jul 29, 2026 - 10:38
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किशनपुर पंचायत में सचिव पर कमीशनखोरी और गबन के आरोप, मारपीट विवाद के बाद कार्रवाई की मांग तेज

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l जिले के पिथौरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत किशनपुर इन दिनों गंभीर विवादों के चलते सुर्खियों में है। पंचायत सचिव श्याम सुंदर नायक पर कमीशनखोरी, विकास कार्यों की राशि में अनियमितता, अवैध वसूली तथा भुगतान में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं पंचायत बैठक के दौरान हुए विवाद और मारपीट की घटना के बाद मामला पुलिस, जिला प्रशासन, जिला पंचायत तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति थाना तक पहुंच गया है।

आरोप है कि पंचायत भवन में आयोजित बैठक के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि पंच और उपसरपंच के साथ मारपीट की स्थिति बन गई। आदिवासी महिला सरपंच और उनके परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि बैठक के दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की गई तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद दोनों पक्षों ने पिथौरा थाना में अलग-अलग आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है।

सरपंच पक्ष का आरोप है कि पंचायत सचिव श्याम सुंदर नायक ने विभिन्न विकास कार्यों के भुगतान के नाम पर कथित रूप से कमीशन की मांग की। आरोपों के अनुसार पंचायत भवन जीर्णोद्धार, इंटरलॉकिंग कार्य और अन्य योजनाओं के भुगतान के एवज में करीब 1 लाख 22 हजार 500 रुपये की अवैध वसूली की गई। इसमें 51 हजार रुपये कथित रूप से विकास कार्यों के भुगतान के लिए तथा 71 हजार रुपये जगन्नाथ मंदिर निर्माण से संबंधित भुगतान के नाम पर लिए जाने का दावा किया गया है।

सरपंच प्रतिनिधि संजय बरिहा ने यह भी दावा किया है कि भुगतान और लेन-देन से संबंधित एक वीडियो सामने आया है, जिसमें राशि लेने का उल्लेख है। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों का आरोप है कि राशि लेने के बावजूद मजदूरों और संबंधित लोगों को समय पर भुगतान नहीं किया गया, जिससे पंचायत क्षेत्र में असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने सचिव को तत्काल हटाने, निलंबित करने तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है।

दूसरी ओर उपसरपंच और पंच पक्ष ने भी अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान सरपंच प्रतिनिधि की ओर से मारपीट की गई। दोनों पक्षों के आरोपों के चलते पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार पंचायत में विकास कार्यों के भुगतान से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए जनपद पंचायत से अधिकारियों की टीम भी पहुंची थी। इसी दौरान विवाद की स्थिति निर्मित होने की बात सामने आई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के कारण पंचायत का वातावरण तनावपूर्ण हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव के कार्यकाल को लेकर पहले भी कई तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका आरोप है कि जहां-जहां सचिव की पदस्थापना रही है, वहां विवाद और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।

महिला सरपंच ने पुलिस अधीक्षक, जिला प्रशासन तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति थाना में आवेदन देकर पंचायत सचिव के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने, निलंबन की कार्रवाई करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं पंच और उपसरपंच के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि पंचायत की विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों पक्षों से प्राप्त शिकायतों की जांच कर रहे हैं। वीडियो, वित्तीय दस्तावेज, भुगतान अभिलेख और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की ओर से अभी तक किसी भी पक्ष के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।