सोशल मीडिया पर आरक्षण के विरुद्ध कथित अभद्र टिप्पणी से आक्रोश, कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी को सौंपा ज्ञापन
कांकेर में सोशल मीडिया पर आरक्षण और मूलनिवासी समाज के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विरोध सामने आया है। डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर स्मारक समिति ने पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा को ज्ञापन सौंपकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
UNITED NEWS OF ASIA. राजेन्द्र मंडावी, कांकेर l सोशल मीडिया पर आरक्षण और मूलनिवासी समाज के खिलाफ कथित रूप से की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर कांकेर जिले में विरोध का माहौल बन गया है। इस मामले में डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर स्मारक समिति, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर ने पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा को ज्ञापन सौंपकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। समिति का आरोप है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रति अपमानजनक एवं भड़काऊ भाषा का प्रयोग किया गया है, जिससे समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं।
समिति द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, फेसबुक पर 'आदर्श मिश्रा' नाम से संचालित एक प्रोफाइल से सार्वजनिक रूप से एक पोस्ट साझा की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पोस्ट में शिक्षा और आरक्षण की तुलना करते हुए ऐसी भाषा का उपयोग किया गया, जिसे समिति ने अभद्र, आपत्तिजनक और सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक बताया है। समिति का कहना है कि इस प्रकार की सामग्री समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास और तनाव उत्पन्न कर सकती है।
ज्ञापन में कहा गया है कि संविधान सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार का उपयोग किसी भी समुदाय, वर्ग या समूह की गरिमा को ठेस पहुंचाने अथवा जातीय वैमनस्य फैलाने के लिए नहीं किया जा सकता। समिति का आरोप है कि संबंधित पोस्ट से मूलनिवासी समाज के सम्मान को ठेस पहुंची है और इससे सामाजिक समरसता प्रभावित होने की आशंका है।
समिति ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की लागू होने वाली प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए। ज्ञापन में यह भी आग्रह किया गया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। किसी भी समुदाय, जाति या वर्ग के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां समाज में तनाव और वैमनस्य पैदा कर सकती हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर कानूनी कार्रवाई होना सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में प्रशासन द्वारा समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन एवं सर्व समाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन तथा धरना-प्रदर्शन करने पर विचार करेगा। समिति का कहना है कि उनका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए न्याय की मांग करना है।
पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच कराने और तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। पुलिस की ओर से यह संकेत दिया गया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की विधिसम्मत जांच की जाएगी तथा जांच के निष्कर्षों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटनाक्रम के बाद कांकेर जिले में सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएं और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने जैसे विषयों पर चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की सामग्री साझा करते समय संवेदनशीलता और कानून का पालन करें।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कौशल किशोर ऊके, बीरबल गढ़पाले, मिथलेश मेश्राम, पालेश्वर राव तुरकर, विश्वेश्वर मेश्राम, एडवोकेट एन. एल. पचबीए, विकास कुमार अंभोरे, कल्याण सिंह मेश्राम, राधेश्याम गनवीर, एस. पी. रामटेके, कार्तिक रामटेके सहित समिति एवं समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मामले की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुरूप कार्रवाई की मांग दोहराई।
फिलहाल इस मामले में पुलिस द्वारा शिकायत प्राप्त कर जांच प्रक्रिया प्रारंभ किए जाने की बात कही गई है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या भ्रामक सामग्री साझा करने से बचें तथा सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।