भारी वर्षा और भू-स्खलन के चलते 48 घंटे के लिए बंद हुआ अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग, जिला प्रशासन ने जारी किया प्रतिबंधात्मक आदेश
दंतेवाड़ा जिले में लगातार हो रही भारी बारिश और भू-स्खलन के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने अरनपुर-जगरगुंडा घाटी मार्ग को आगामी 48 घंटे तथा वर्षा अवधि तक आवागमन के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मार्ग का उपयोग नहीं करने की अपील की है।
UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l जिले में लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। विशेष रूप से बड़े बचेली अनुभाग अंतर्गत आने वाले अरनपुर-जगरगुंडा घाटी मार्ग पर भू-स्खलन (लैंडस्लाइड) का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। यात्रियों और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने इस मार्ग पर आगामी 48 घंटे तथा वर्षा अवधि तक सभी प्रकार के आवागमन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूरी तरह जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
जिला कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अरनपुर-जगरगुंडा घाटी क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ियों से मिट्टी और पत्थरों के खिसकने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार बचेली तथा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी समय दोबारा भू-स्खलन हो सकता है।
प्रशासन के अनुसार 28 जुलाई 2026 की रात इस मार्ग पर लैंडस्लाइड की घटना हुई थी, जिससे सड़क पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया था। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने लगभग छह घंटे तक लगातार राहत एवं मरम्मत कार्य चलाकर मार्ग को अस्थायी रूप से चालू कराया। हालांकि, मरम्मत के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी।
मौके पर किए गए निरीक्षण में पाया गया कि पहाड़ी से लगातार पानी के साथ मिट्टी का रिसाव जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति दोबारा बड़े भू-स्खलन का कारण बन सकती है। इसके अलावा घाटी क्षेत्र के कई अन्य स्थानों पर भी लगातार बारिश के चलते पेड़ों के गिरने, चट्टानों के खिसकने और सड़क धंसने की आशंका बनी हुई है।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर तेज जल प्रवाह के कारण सड़क के किनारे का हिस्सा अंदर से पूरी तरह खोखला और क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसे स्थानों पर भारी वाहनों के साथ-साथ हल्के वाहनों का आवागमन भी जोखिम भरा हो सकता है। यदि इस स्थिति में मार्ग को खुला रखा जाता है, तो किसी भी समय बड़ा हादसा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग पर आगामी 48 घंटे के लिए तथा आवश्यकता पड़ने पर वर्षा अवधि तक आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने सभी नागरिकों, वाहन चालकों, परिवहन संचालकों तथा संबंधित विभागों से इस आदेश का पालन करने की अपील की है।
प्रशासन ने कहा है कि लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं। मौसम की स्थिति, वर्षा की तीव्रता और सड़क की सुरक्षा का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। जब विशेषज्ञों द्वारा मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया जाएगा, तभी आवागमन दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
जिला प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें। यदि किसी क्षेत्र में सड़क अवरुद्ध होने, भू-स्खलन या अन्य आपात स्थिति की जानकारी मिले तो तत्काल स्थानीय प्रशासन या संबंधित विभाग को सूचित करें।
बारिश के मौसम में दंतेवाड़ा जिले के पर्वतीय और घाटी क्षेत्रों में भू-स्खलन की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसलिए प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा संबंधी कदम उठा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन ने एक बार फिर आमजन से अपील की है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग का उपयोग करने का प्रयास न करें। प्रशासन का मानना है कि कुछ समय की असुविधा स्वीकार कर जनहानि और दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। मौसम सामान्य होने और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही इस सड़क पर यातायात पुनः प्रारंभ किया जाएगा। वर्तमान में संबंधित विभाग राहत, निगरानी और मरम्मत कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं, ताकि स्थिति सामान्य होते ही मार्ग को सुरक्षित रूप से बहाल किया जा सके।