कबीरधाम में धान खरीदी घोटाले का खुलासा, बिडोरा केंद्र में लाखों की कमी उजागर

कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। बिडोरा उपार्जन केंद्र में करीब 22 लाख रुपये मूल्य का धान कम पाया गया, जबकि जिले के अन्य केंद्रों में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं।

Apr 25, 2026 - 17:43
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कबीरधाम में धान खरीदी घोटाले का खुलासा, बिडोरा केंद्र में लाखों की कमी उजागर

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव कवर्धा l छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर विवादों में घिर गई है। जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला सेवा सहकारी समिति बिडोरा के अंतर्गत संचालित धान उपार्जन केंद्र का है, जहां जांच के दौरान लाखों रुपये मूल्य के धान की कमी पाई गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिडोरा उपार्जन केंद्र में करीब 22 लाख 26 हजार रुपये मूल्य का धान कम पाया गया है। यह खुलासा जांच समिति की रिपोर्ट में हुआ, जिसने 26 फरवरी 2026 को आकस्मिक निरीक्षण किया था। इस जांच में मंडी उप निरीक्षक और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम शामिल थी। निरीक्षण के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर और अन्य कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन धान खरीदी प्रभारी अर्जुन यादव अनुपस्थित पाए गए।

जांच में सामने आया कि ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में 65045 बोरा धान होना चाहिए था, लेकिन भौतिक सत्यापन में मात्र 62664 बोरा धान ही पाया गया। इस प्रकार कुल 2381 बोरा, यानी लगभग 952.40 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई। वर्तमान समर्थन मूल्य के अनुसार यह राशि लगभग 22 लाख रुपये से अधिक बैठती है, जिससे शासन को सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है।

यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब जिले के अन्य उपार्जन केंद्रों—बघर्रा, बाघामुड़ा और रमतला—में भी हाल ही में करीब 4472 क्विंटल धान गायब पाए जाने की बात सामने आई थी। इन मामलों की कुल अनुमानित राशि 1 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि धान खरीदी प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं।

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि धान खरीदी सत्र 2025-26 के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है और यह सब सुनियोजित तरीके से हुआ है। उनके अनुसार, उपार्जन केंद्र से लेकर संग्रहण और कस्टम मिलिंग तक कई स्तरों पर गड़बड़ियां की गई हैं।

जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। इसमें बिडोरा समिति की प्रोत्साहन राशि काटने, गायब धान की राशि की वसूली करने और संबंधित प्रभारी को काली सूची में डालने की सिफारिश शामिल है। साथ ही केंद्र को आगामी वर्ष के लिए संवेदनशील सूची में रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि किसानों के हितों और सरकारी संसाधनों की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और दोषियों पर किस प्रकार की कार्रवाई होती है।