प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद कबीरधाम में आदिवासियों का धरना स्थगित, 10 दिन का अल्टीमेटम

कबीरधाम में जमीन संबंधी मांगों को लेकर दो दिनों से चल रहा आदिवासियों का अनिश्चितकालीन धरना प्रशासन के लिखित आश्वासन और जांच आदेश के बाद स्थगित कर दिया गया। आदिवासी विकास परिषद ने 10 दिनों में मांगें पूरी नहीं होने पर चक्काजाम और कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी दी है।

Jul 11, 2026 - 10:07
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प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद कबीरधाम में आदिवासियों का धरना स्थगित, 10 दिन का अल्टीमेटम

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l जिले में जमीन संबंधी लंबित मामलों को लेकर पिछले दो दिनों से जारी आदिवासियों का अनिश्चितकालीन धरना प्रशासन के लिखित आश्वासन और जांच के आदेश के बाद फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद (शाखा कबीरधाम) के जिलाध्यक्ष कामू बैगा के नेतृत्व में 9 जुलाई से शुरू हुआ यह आंदोलन 10 जुलाई की रात प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति के बाद समाप्त हुआ।

धरने के दौरान कबीरधाम कलेक्टर, वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) और सहायक आयुक्त के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों से जुड़े दस्तावेज और शिकायतें प्रशासन के समक्ष रखीं। चर्चा के बाद प्रशासन ने संबंधित मामलों की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद आदिवासी विकास परिषद और ग्रामीणों ने आपसी सहमति से आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया।

यह आंदोलन मुख्य रूप से ग्राम नागा डबरा और चिता डबरी के ग्रामीणों की जमीन संबंधी समस्याओं को लेकर किया जा रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी भूमि से जुड़े प्रकरण लंबित हैं और कई बार शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं हो सका। इसी कारण ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ कलेक्ट्रेट परिसर के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था।

दो दिनों तक चले इस आंदोलन में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलन के दौरान परिषद के महासचिव दिलावर पारधी और कमल धुर्वे, कोषाध्यक्ष ओमकार सिंद्राम, कानूनी सलाहकार आत्मा धुर्वे और सलीम पारधी सहित महेश धुर्वे, हेमलाल मरकाम, मनीष कुमार यादव, मियांजी बैगा, लमान सिंह बैगा, लमना बैगा, तिहार सिंह बैगा और राजा बैगा समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने प्रशासन से लंबित मामलों का शीघ्र और निष्पक्ष समाधान करने की मांग की।

धरना समाप्त करते हुए कामू बैगा ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन के लिखित आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन को केवल 10 दिनों के लिए स्थगित किया गया है। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर जमीन संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो आदिवासी समाज फिर से आंदोलन शुरू करेगा।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में कलेक्ट्रेट का घेराव, व्यापक चक्काजाम और बड़े स्तर पर जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल ग्रामीण प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर आदिवासी समाज की आगे की रणनीति तय होगी।