बैठक में एसोसिएशन ने अनुबंधित पीजी चिकित्सा अधिकारियों के वेतन को लेकर अपनी मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि पीजी चिकित्सा अधिकारियों का वेतन पीजी के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को मिलने वाले स्टाइपेंड से अधिक होना चाहिए। इसके साथ ही एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए वर्तमान में निर्धारित अनुबंध राशि को कम करने का आग्रह किया गया।
जूनियर डॉक्टर्स ने अनुबंधित सेवा की अवधि को भी चर्चा का प्रमुख विषय बनाया। एसोसिएशन ने मौजूदा दो वर्ष की अनुबंधित सेवा अवधि को घटाकर एक वर्ष करने की मांग रखी। इसके अलावा उच्च अध्ययन के लिए चिकित्सकों को अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का अनुरोध भी किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने सुपर-स्पेशियलिटी विशेषज्ञों के लिए अलग कैडर के गठन की मांग भी स्वास्थ्य मंत्री के सामने रखी। एसोसिएशन के अनुसार, विशेषज्ञ चिकित्सकों से जुड़े कैडर और सेवा संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों को सुना और कहा कि पीजी चिकित्सा अधिकारियों के वेतन, अनुबंध राशि तथा अन्य मांगों पर शासन स्तर पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो मांगें उचित और नियमों के अनुरूप पाई जाएंगी, उन पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
मंत्री ने चिकित्सकों से अपने अध्ययन और चिकित्सा सेवा को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा मानवता की महत्वपूर्ण सेवाओं में से एक है और चिकित्सकों को पूरी लगन से अध्ययन कर बेहतर चिकित्सक बनने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने मरीजों के उपचार और देखभाल को प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए चिकित्सकों से अपना कार्य निरंतर जारी रखने की बात कही, ताकि उपचार के लिए आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चिकित्सकों और चिकित्सा विद्यार्थियों के हितों के प्रति संवेदनशील है। चिकित्सकों की ओर से रखी गई मांगों पर नियमों के अनुसार विचार किए जाने की बात कही गई।
स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई चर्चा के बाद जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने संतोष व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना गया है और उन्हें उम्मीद है कि संबंधित विषयों पर सकारात्मक समाधान की दिशा में आगे कार्रवाई होगी।