गश्ती दल ने तत्काल घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी। सूचना मिलने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल सहित आसपास के क्षेत्र की घेराबंदी कर जांच शुरू की। मामले की जांच के लिए डॉग स्क्वाड की सहायता भी ली गई। टीम द्वारा घटनास्थल और आसपास के वन क्षेत्र में सघन जांच की गई, ताकि घटना से जुड़े संभावित साक्ष्य जुटाए जा सकें।
लगभग 11 माह की मादा बाघ शावक
घटनास्थल पर आवश्यक जांच के बाद डॉ. संदीप अग्रवाल, वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी और डॉ. ललित चौरसिया, पशु चिकित्सक के दल द्वारा मृत बाघ शावक का परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान शावक की आयु लगभग 11 माह पाई गई। जांच में उसका लिंग मादा बताया गया है।
परीक्षण के दौरान बाघ शावक के शरीर पर अन्य वन्यजीव से संघर्ष के निशान और चोटें पाई गईं। इन चोटों के आधार पर प्रारंभिक तौर पर आपसी संघर्ष के कारण उसकी मृत्यु होने की संभावना व्यक्त की गई है। हालांकि, घटना से संबंधित आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी करने के साथ फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने भी संकलित किए गए हैं।
फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने संकलित
वन विभाग द्वारा घटना के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक जांच और दस्तावेजीकरण किया गया। मृत बाघ शावक के परीक्षण के दौरान फॉरेंसिक जांच के लिए जरूरी नमूने सुरक्षित किए गए हैं। इससे घटना से जुड़े तथ्यों की आगे जांच में सहायता मिलेगी।
वन क्षेत्र में बाघों की गतिविधियों और घटना से जुड़े संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों द्वारा मौके पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। प्रारंभिक परीक्षण में संघर्ष के निशान सामने आने के बाद आपसी संघर्ष को संभावित कारण माना गया है।
निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत किया गया अंतिम निस्तारण
घटना की आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद मृत बाघ शावक के शव का एनटीसीए द्वारा निर्धारित मानक प्रोटोकॉल के अनुसार अंतिम निस्तारण किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान रविंद्र मणि त्रिपाठी, क्षेत्र संचालक, एनटीसीए द्वारा नामित प्रतिनिधि शिवांगी वेंन्द्रे तथा दाह/भस्मीकरण समिति के अन्य उपस्थित सदस्यों की मौजूदगी रही।
निर्धारित प्रक्रिया के तहत मृत बाघ शावक के शव का पूर्णतः दाह/भस्मीकरण कर नष्ट किया गया। घटना के संबंध में आवश्यक दस्तावेजीकरण और जांच प्रक्रिया भी पूरी की गई।
वन क्षेत्र में इस तरह की घटनाओं की निगरानी और जांच के लिए वन विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बाघ शावक की मौत के पीछे अन्य वन्यजीव के साथ संघर्ष की संभावना सामने आई है, जबकि फॉरेंसिक जांच के लिए संकलित नमूनों की प्रक्रिया भी घटना की जांच का हिस्सा है।