भारत ने एडवांस अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया, MIRV तकनीक से कई टार्गेट्स पर एकसाथ हमला संभव

भारत ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड से एडवांस अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। MIRV तकनीक से लैस यह मिसाइल एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है और इसकी रेंज 5000 किलोमीटर से अधिक है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और सेना को इस उपलब्धि पर बधाई दी।

May 11, 2026 - 13:13
May 11, 2026 - 13:15
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भारत ने एडवांस अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया, MIRV तकनीक से कई टार्गेट्स पर एकसाथ हमला संभव

UNITED NEWS OF ASIA. भारत ने अपनी सामरिक और रक्षा क्षमता को और मजबूत करते हुए एडवांस अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने दुनिया को अपनी अत्याधुनिक सैन्य तकनीक और रणनीतिक ताकत का एक और बड़ा संदेश दिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस मिसाइल में मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल यानी MIRV तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बेहद घातक और आधुनिक बनाती है।

अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण 8 मई 2026 को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड से किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल को कई पेलोड के साथ लॉन्च किया गया और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित अलग-अलग लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मिशन के सभी उद्देश्य पूरी तरह सफल रहे।

MIRV तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों पर एकसाथ हमला किया जा सकता है। इसका मतलब है कि अग्नि-5 एक साथ कई न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाकर दुश्मन के विभिन्न ठिकानों को निशाना बना सकती है। यही वजह है कि इस तकनीक को आधुनिक युद्ध प्रणाली में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत ने पहली बार मार्च 2024 में MIRV तकनीक वाली अग्नि-5 का परीक्षण किया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मिशन दिव्यास्त्र” नाम दिया था। इसके साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया था जिनके पास MIRV क्षमता मौजूद है। इस सूची में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश शामिल हैं।

अग्नि-5 मिसाइल की रेंज 5000 किलोमीटर से अधिक बताई गई है। इसमें तीन चरणों वाला सॉलिड फ्यूल इंजन लगाया गया है, जो इसे लंबी दूरी तक तेज गति से पहुंचने में सक्षम बनाता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अग्नि-5 का MIRV वर्जन चार से पांच वॉरहेड ले जाने की क्षमता रख सकता है, हालांकि सरकार ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

इस सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और भारतीय सेना को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में ऐसी तकनीकें देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं।

DRDO द्वारा विकसित अग्नि श्रृंखला भारत की सामरिक ताकत की रीढ़ मानी जाती है। अग्नि-1 की रेंज 700 किलोमीटर, अग्नि-2 की 2000 किलोमीटर, अग्नि-3 की 3000 किलोमीटर और अग्नि-4 की 4000 किलोमीटर तक है। वहीं अग्नि-5 सबसे उन्नत और लंबी दूरी की मिसाइलों में शामिल है।

भारत की परमाणु नीति “नो फर्स्ट यूज” सिद्धांत पर आधारित है, यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन यदि उस पर हमला होता है तो जवाब निर्णायक और व्यापक होगा। भारत के पास जमीन, समुद्र और हवा तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता है, जिससे उसकी रणनीतिक शक्ति और भी मजबूत हो गई है।

इस परीक्षण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत सैन्य उपस्थिति दर्ज करा रहा है।