गरियाबंद में आंगनबाड़ी भर्ती पर विवाद, योग्य अभ्यर्थी को बाहर करने और धांधली के आरोप

गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक में आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। योग्य अभ्यर्थी को बाहर करने और अपात्र को लाभ देने के आरोपों के बीच ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Apr 10, 2026 - 16:10
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गरियाबंद में आंगनबाड़ी भर्ती पर विवाद, योग्य अभ्यर्थी को बाहर करने और धांधली के आरोप

UNITED NEWS OF ASIA.  राधे पटेल, गरियाबंद। गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा निकाली गई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। उरमाल, अमलीपदर, झरगांव और गोहरापदर सेक्टर के लिए कुल 6 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जिसमें 1 पद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता (12वीं पास) और 5 पद सहायिका (8वीं पास) के लिए निर्धारित थे।

भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राम धरनीधोड़ा में सहायिका पद के चयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में दो अभ्यर्थियों—ललिता नेताम और माधुरी दुर्गा—का नाम प्रमुख रूप से चर्चा में है। ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि चयन समिति ने एक अत्यंत योग्य अभ्यर्थी को जानबूझकर चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया।

बताया जा रहा है कि संबंधित अभ्यर्थी ने सत्र 2019-20 में 8वीं बोर्ड परीक्षा में 96.96% अंक प्राप्त किए थे, जो उसे इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बनाता था। लेकिन चयन समिति ने यह कहते हुए उसकी उम्मीदवारी खारिज कर दी कि यह परिणाम कोरोना काल के दौरान घोषित हुआ था और इसे मान्य नहीं माना जाएगा। इस निर्णय पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं और इसे अनुचित बताया है।

वहीं दूसरी ओर, आरोप यह भी है कि चयनित अभ्यर्थी को गरीबी रेखा (BPL) श्रेणी का लाभ अनुचित तरीके से दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अभ्यर्थी इस श्रेणी के लिए पात्र नहीं थी, इसके बावजूद उसे 6 अतिरिक्त अंक प्रदान कर दिए गए, जिसके आधार पर उसका चयन कर लिया गया।

इस कथित धांधली के खिलाफ ग्रामीणों ने विधिवत दावा-आपत्ति दर्ज कराई और मामले की शिकायत कलेक्टर, महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपी। हालांकि, शिकायत दर्ज हुए 25 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की जांच शुरू नहीं की गई है, जिससे लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

ग्राम धरनीधोड़ा के लोचन दुर्गा और खजूरपदर के चैतन सिंह नेताम ने इस मामले को सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में अधिकारियों और चयन समिति की मिलीभगत से गड़बड़ी की गई है। उनका कहना है कि यह न केवल योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, बल्कि पूरी प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में कब संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करता है और प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाता है।