डोंगरगढ़ ज्योति विसर्जन: आस्था के आगे थमी रफ्तार, ट्रेनें भी रुकीं

डोंगरगढ़ में चैत्र नवरात्र के समापन पर निकली ज्योति विसर्जन शोभायात्रा के दौरान रेलवे ने मेगा ब्लॉक लगाकर ट्रेनों को रोका। यह परंपरा आस्था और इतिहास का अनूठा संगम है।

Mar 28, 2026 - 16:25
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डोंगरगढ़ ज्योति विसर्जन: आस्था के आगे थमी रफ्तार, ट्रेनें भी रुकीं

UNITED NEWS OF ASIA. नेमिस अग्रवाल, डोंगरगढ़।  छत्तीसगढ़ की आस्था नगरी डोंगरगढ़ में चैत्र नवरात्र 2026 का समापन भव्य और ऐतिहासिक अंदाज में हुआ। मां बम्लेश्वरी मंदिर से निकली ज्योति विसर्जन शोभायात्रा ने एक बार फिर आस्था की ऐसी मिसाल पेश की, जहां श्रद्धा के आगे रफ्तार भी थम गई।

नवरात्र के अंतिम दिन सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर ज्योति कलश धारण कर शोभायात्रा की शुरुआत की। मंदिर परिसर से निकली यह यात्रा ढोल-नगाड़ों, देवी गीतों और “जय माँ बम्लेश्वरी” के गगनभेदी जयकारों के बीच पूरे शहर में आगे बढ़ती रही। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और भक्ति से सराबोर वातावरण ने डोंगरगढ़ को पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

इस यात्रा का सबसे रोमांचक और अनोखा दृश्य तब सामने आया, जब शोभायात्रा मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर पहुंची। आस्था के सम्मान में रेलवे प्रशासन ने मेगा ब्लॉक घोषित किया, जिसके चलते दोनों ओर से आने वाली ट्रेनों को रोक दिया गया। कुछ समय के लिए पटरियों पर सन्नाटा छा गया और हजारों श्रद्धालु सुरक्षित रूप से रेल ट्रैक पार कर सके।

बताया जाता है कि यह परंपरा अंग्रेजों के समय से चली आ रही है। खैरागढ़ राजपरिवार की शर्त के अनुसार नवरात्र के दौरान ज्योति विसर्जन शोभायात्रा के समय ट्रेनों को रोका जाता है। आज भी रेलवे इस परंपरा का सम्मान करता है, जो आस्था और इतिहास के अनूठे संगम का प्रतीक है।

रेल ट्रैक पार करने के बाद शोभायात्रा मां शीतला मंदिर पहुंची, जहां मां बम्लेश्वरी और मां शीतला का प्रतीकात्मक मिलन हुआ। इसके बाद यात्रा ऐतिहासिक महावीर तालाब की ओर बढ़ी, जहां हजारों ज्योति कलशों का विधिवत विसर्जन किया गया। इस दौरान “जय माँ बम्लेश्वरी” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

महावीर तालाब पर एक साथ हजारों कलशों का विसर्जन दृश्य अत्यंत भव्य और मनमोहक था। श्रद्धालुओं की आस्था, अनुशासन और उत्साह ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। इसमें सभी वर्गों के लोग मिलकर भाग लेते हैं, जिससे समाज में भाईचारे और सामूहिकता की भावना मजबूत होती है।

डोंगरगढ़ का यह ज्योति विसर्जन कार्यक्रम हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान को देशभर में विशेष स्थान दिलाता है।

कुल मिलाकर, इस वर्ष का ज्योति विसर्जन आयोजन एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि सच्ची आस्था के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है—यहां तक कि समय और रफ्तार भी।