गरीब दिव्यांग किसान ने पटवारी और कोटवार पर लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड के ग्राम भनेसर निवासी 71 वर्षीय दिव्यांग किसान नरेश खरे ने पटवारी और कोटवार पर भूमि विवाद में परेशान करने, निर्माण कार्य रोकने तथा रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।

Jun 24, 2026 - 11:30
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गरीब दिव्यांग किसान ने पटवारी और कोटवार पर लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

UNITED NEWS OF ASIA. विशु तिवारी, बिलासपुर l बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम भनेसर में एक दिव्यांग किसान ने स्थानीय पटवारी और कोटवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। 71 वर्षीय नरेश खरे का कहना है कि उनकी पुश्तैनी भूमि को हड़पने की साजिश के तहत उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके मकान निर्माण कार्य में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।

नरेश खरे ने बताया कि उनके पिता रतन खरे को पूर्व में भूमिहीन एवं असहाय परिवारों के पुनर्वास के लिए संचालित भूमि वितरण योजना के तहत लगभग दो एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। परिवार कई वर्षों से इस भूमि पर खेती करता रहा है। वर्तमान में वृद्धावस्था और शारीरिक दिव्यांगता के कारण खेती करना संभव नहीं है, इसलिए वे अपनी भूमि पर मकान बनाकर जीवन यापन करना चाहते हैं।

किसान का आरोप है कि उनकी जमीन के सामने रहने वाले अमित बेहरा और उनकी माता जया बेहरा द्वारा कई बार जमीन बेचने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने भूमि बेचने से इंकार कर दिया, तब कथित रूप से विभिन्न माध्यमों से निर्माण कार्य रुकवाने और जमीन पर दावा करने के प्रयास शुरू कर दिए गए। नरेश खरे का कहना है कि इस विवाद के चलते उन्हें लगातार मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित पक्ष द्वारा संचालित जिम, हॉस्टल, कोचिंग सेंटर और चर्च के कारण क्षेत्र में पार्किंग तथा आवागमन की समस्याएं बनी रहती हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। किसान ने आरोप लगाया कि स्थानीय पटवारी अभिनव गिरी और कोटवार बार-बार समझौते का दबाव बनाते हुए उन्हें प्रभावशाली लोगों से विवाद न करने की सलाह देते हैं।

नरेश खरे ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने मकान निर्माण शुरू करने का प्रयास किया, तब कथित रूप से कोटवार के माध्यम से उनसे 20 हजार रुपये की मांग की गई। उनका दावा है कि गांव में अन्य लोगों द्वारा किए गए निर्माण कार्यों पर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं की गई, जबकि उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

भूमि विवाद को लेकर मामला पहले तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय तक पहुंच चुका है। किसान के अनुसार दोनों न्यायालयों ने उनके पक्ष में निर्णय दिया और विरोधी पक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ और उन्हें लगातार परेशान किए जाने का आरोप है।

दिव्यांग किसान ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपों की सत्यता की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपनी भूमि पर मकान निर्माण की अनुमति और सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की है।

हालांकि, इस मामले में पटवारी, कोटवार और अन्य संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।