डिंडोरी में वन्यप्राणी अपराध का खुलासा, 2 जंगली सूअर के शिकार, बिक्री व परिवहन में 8 आरोपी गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के करंजिया वन परिक्षेत्र अंतर्गत वनग्राम जगतपुर और नारीग्वारा में 2 जंगली सूअर के अवैध शिकार, बिक्री एवं परिवहन के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके पर जप्ती कर वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया है।
UNITED NEWS OF ASIA.ओपी परस्ते, डिंडोरी (मध्य प्रदेश)। जिले के करंजिया वन परिक्षेत्र अंतर्गत वन्यप्राणी संरक्षण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त सूचना के आधार पर वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए वनग्राम जगतपुर एवं नारीग्वारा के कुछ लोगों द्वारा किए गए अवैध वन्यप्राणी शिकार का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में 2 जंगली सूअर के शिकार, उनकी बिक्री एवं परिवहन में संलिप्त कुल 8 आरोपियों को पकड़ा गया है।
वन विभाग को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ लोग संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यप्राणियों का अवैध शिकार कर मांस की बिक्री एवं परिवहन कर रहे हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए करंजिया वन परिक्षेत्र की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी और योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी। कार्रवाई के दौरान आरोपियों को जंगली सूअर के अवशेषों के साथ पकड़ा गया।
मौके पर वन विभाग द्वारा नियमानुसार संपूर्ण जप्ती की कार्रवाई की गई। शिकार में प्रयुक्त सामग्री, परिवहन में इस्तेमाल किए गए साधन एवं अन्य साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इसके पश्चात सभी 8 आरोपियों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंगली सूअर अनुसूचित वन्यप्राणी की श्रेणी में आते हैं और उनका शिकार, परिवहन अथवा बिक्री करना कानूनन अपराध है। इस प्रकार की गतिविधियां न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए खतरा हैं, बल्कि जैव विविधता को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे वन्यप्राणियों के संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी प्रकार की अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी तुरंत विभाग को दें। समय पर सूचना मिलने से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
इस कार्रवाई को वन विभाग की सतर्कता और सक्रियता का परिणाम माना जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्यप्राणी अपराधों के प्रति विभाग की नीति शून्य सहनशीलता की है और भविष्य में भी इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते रहेंगे।