अचार की अलग-अलग रेसिपी में सामग्री काफी अलग हो सकती है। कुछ तैयार अचारों में स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी या अन्य मीठे पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि नमक और तेल की मात्रा भी अधिक हो सकती है। डायबिटीज वाले लोगों को ऐसे अचार का नियमित और अधिक सेवन करने से बचना चाहिए। घर पर अचार तैयार करते समय बिना अतिरिक्त चीनी या कम चीनी वाली रेसिपी और सीमित मात्रा में तेल-नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है। अचार को भोजन का मुख्य हिस्सा बनाने के बजाय स्वाद बढ़ाने के लिए थोड़ी मात्रा में लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
पापड़ की बात करें तो इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री के अनुसार कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। बाजार में उपलब्ध कुछ पापड़ों में नमक और अन्य सामग्री भी अधिक हो सकती है। पापड़ को पकाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। तेल में तला हुआ पापड़ अतिरिक्त तेल और कैलोरी बढ़ा सकता है। इसलिए पापड़ खाना हो तो सीमित मात्रा में और बिना तले हुए विकल्प को प्राथमिकता देना बेहतर हो सकता है।
चटनी के मामले में भी सभी विकल्प एक जैसे नहीं होते। धनिया, पुदीना, हरी मिर्च, नींबू और मसालों से तैयार ताजा चटनी को सीमित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। वहीं कुछ चटनियों में गुड़, चीनी, मीठी सॉस या अधिक मात्रा में मीठे फल शामिल हो सकते हैं। ऐसी चटनी में शुगर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए चटनी लेते समय उसकी सामग्री पर ध्यान देना जरूरी है।
डायबिटीज में सबसे महत्वपूर्ण बात मात्रा और पूरे भोजन का संतुलन है। अचार, पापड़ और चटनी को भोजन की छोटी संगत के रूप में लेना चाहिए, मुख्य भोजन के रूप में नहीं। पैकेज्ड उत्पाद खरीदते समय लेबल पर Added Sugar, Total Carbohydrate और Sodium की जानकारी देखना उपयोगी हो सकता है।
डायबिटीज का प्रबंधन केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर नहीं करता। पूरे दिन की डाइट, भोजन की मात्रा, शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित पालन महत्वपूर्ण है। इसलिए अचार, पापड़ और चटनी को लेकर पूरी तरह डरने के बजाय उनकी सामग्री, मात्रा और सेवन की नियमितता पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक तरीका है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डाइट में बदलाव के लिए डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लेना उचित रहेगा।