धर्मेंद्र प्रधान को बचाने विजय शर्मा ने जज के शब्दों का झूठा सहारा लिया - डॉ. महंत
छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बयान पर पलटवार करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भाजपा पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने NEET और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, छात्रों के आंदोलनों और सरकार की जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठाए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर विजय शर्मा द्वारा दिए गए बयान को तथ्यों से परे बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा अपने नेताओं और सरकार की जवाबदेही से बचने के लिए जज की टिप्पणी का सहारा ले रही है।
डॉ. महंत ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किसी न्यायाधीश की टिप्पणी के कारण नहीं हुआ, बल्कि NEET सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, कथित अनियमितताओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में उठे सवालों के बीच सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ा था। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंताओं के कारण देशभर में विरोध और जनाक्रोश देखने को मिला।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस न्यायिक टिप्पणी का हवाला विजय शर्मा दे रहे हैं, वह उनके दावे को साबित नहीं करती। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों का विरोध शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर था। उनके अनुसार, छात्रों ने न्यायपालिका के खिलाफ आंदोलन करने के बजाय टिप्पणी को व्यंग्यात्मक रूप में अपने प्रतिरोध का हिस्सा बनाया।
डॉ. महंत ने विजय शर्मा द्वारा राहुल गांधी से कथित गोली चलने की घटना को प्रमाणित करने की मांग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले अपने ही रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों को स्पष्ट करना चाहिए। डॉ. महंत ने दावा किया कि सूचना के अधिकार के तहत दिल्ली के कुछ सरकारी अस्पतालों से प्रदर्शनकारियों के उपचार से संबंधित जानकारी सामने आई है। उन्होंने पुलिस रिकॉर्ड में रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा एंटी-रायट गन से राउंड फायर किए जाने के उल्लेख का भी हवाला देते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने विजय शर्मा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को विरोधाभासों से भरा बताते हुए कहा कि एक ओर भाजपा युवाओं के विरोध को स्वागत योग्य बताती है, वहीं दूसरी ओर उसी आंदोलन को अराजकता और राजनीतिक साजिश से जोड़ने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के प्रति भाजपा के रुख में बदलाव राजनीतिक परिस्थितियों का परिणाम दिखाई देता है।
डॉ. महंत ने भाजपा नेताओं और वैचारिक संगठनों से जुड़े कुछ लोगों के कथित बयानों का उल्लेख करते हुए महिला प्रदर्शनकारियों के सम्मान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाने वाली छात्राओं के संबंध में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों और महिला सम्मान के खिलाफ है।
उन्होंने विजय शर्मा से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या वे छात्राओं और महिला प्रदर्शनकारियों के संबंध में दिए गए आपत्तिजनक बयानों की निंदा करते हैं। डॉ. महंत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करने वाले युवाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए और सरकार को उनकी समस्याओं का जवाब देना चाहिए।
डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि युवाओं और छात्राओं के आंदोलनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय सरकार को परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, छात्रों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं के प्रति किसी भी प्रकार की अभद्रता या अपमान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने अंत में छात्राओं पर कथित रूप से स्याही फेंके जाने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही बेटियों के साथ इस तरह का व्यवहार शर्मनाक है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।