धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को कांग्रेस ने बताया युवा शक्ति की जीत, परीक्षा प्रणाली में सुधार की उठाई मांग
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने इसे लोकतंत्र और युवा शक्ति की जीत बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा धांधली और पेपर लीक के खिलाफ देशभर में छात्रों और युवाओं के आंदोलन के दबाव में सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। साथ ही परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र और देश के करोड़ों छात्रों एवं युवाओं की जीत बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा धांधली और पेपर लीक के खिलाफ लंबे समय से चल रहे विरोध और युवाओं के आक्रोश के आगे केंद्र सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा।
डॉ. शिवकुमार डहरिया ने कहा कि देशभर के छात्रों और युवाओं ने लगातार अपनी आवाज बुलंद की, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा। उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्ति का इस्तीफा नहीं, बल्कि युवाओं की एकजुटता, लोकतांत्रिक संघर्ष और जनदबाव की सफलता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लगातार छात्रों और युवाओं के हितों की आवाज उठाई। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को मजबूती से देश के सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि पिछले 56 दिनों से लगातार छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया, जिसके कारण सरकार पर दबाव बढ़ा और अंततः उसे निर्णय लेना पड़ा।
डॉ. डहरिया ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे मामलों में केवल जिम्मेदार व्यक्तियों के इस्तीफे से समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही प्रभावित विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने, उच्चस्तरीय जांच कराने और परीक्षा प्रक्रिया को लीक-मुक्त बनाने के लिए ठोस कानूनी एवं प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग की।
डॉ. शिवकुमार डहरिया ने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता। जब तक परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन नहीं किए जाएंगे और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसे मामलों पर चिंता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस युवाओं के अधिकारों, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।
उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम पूरे देश के लिए एक संदेश है कि लोकतंत्र में जनता और युवाओं की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है। जब छात्र और युवा अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाते हैं तो सरकारों को भी उनकी बात सुननी पड़ती है। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों का विश्वास मजबूत हो सके।